पसीने की पुकार नये राजस्थान का स्वर्णिम संसार -डॉ.अमर सिंह राठौड़राजस्थान का गुजरा 24 महीने का काल केवल इसलिये विशेष नहीं था कि वह सामान्य काल से हटकर था। विशेष इसलिये भी नहीं था कि किसी घटना विशेष के सन्दर्भ में याद रह जाता। विशेष इसलिये था, क्योंकि यह एक विचार को विकास की सामूहिक इच्छा में रूपान्तरित कर अपने प्रदेश के नवनिर्माण के जरिये एक समृद्घ, एक स्वस्थ, एक साक्षर, एक हरित, एक जगमग और मुस्कान लिये प्रदेश बनाने का संकल्प लेने और उसे क्रियान्वित करने का श्रेष्ठतम मार्ग बनाने का काल था। इस काल में यह भी जान लिया गया कि सरकार सबके लिये वह सब क्या करे जो सबकी आकांक्षा, ज्ञान और विचार के माध्यम से श्रेष्ठतम निष्कर्ष के अनुरूप हो।
भाव सूक्ष्म होता है और क्रियान्वयन विराट, सूक्ष्म को जाग्रत कर विराट में रूपान्तरित करने के सर्वमान्य उपाय की खोज इसी 24 महीने के काल की श्रेष्ठतम उपलब्धि रही है, यह काल इसलिये भी विशेष था। यह काल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सोच का अगला पड़ाव था। एक व्यक्ति अपने अपनेपन के सुप्त भाव को जाग्रत कराने के लिए गांव-गांव, गली-गली अलख जगाता रहा और व्यापक जन मानस से लगातार एकाकार होता रहा और अपने प्रदेश के नये सिरे से निर्माण के लिये उपायों के रूप में युगान्तरी नीतियों और कार्यक्रमों का ताना-बाना बुनता रहा। अपनेपन के भाव से प्रदेश के लिए और विकास की इबारत लिखने और मंत्र ढूंढने की पाठशाला जन-जन का मानस ही हो सकता है, जनमानस को टटोलने का यह विशेष काल था।
दरअसल ईमानदार प्रतिक्रिया करें तो हममें अपने प्रदेश के लिए अपनेपन से भरी टीस और इसके विकास के लिए व्याकुल करती हूक कभी रखी ही नहीं। बेशक हम भाइयों की तरह एक घर में रहें मगर अलग-अलग कमरों में, अपने कमरों को ही अपना घर मानकर, हमने अपनी रोटियां सेकी, अपनी ढपली बजाई और अपने कक्ष के गुण गाये। बेशक इस भाव शून्यता के भौगोलिक अन्यान्य कारण रहे हों मगर हम समूह रहे परिवार नहीं बन सके। क्यों करें हम अपने प्रदेश से प्रेम और क्यों करें प्रयत्न इसे समृद्घ और खुशहाल बनाने का? प्रश्न जितना शुष्क है, उसका उत्तर उतना ही कोमल किन्तु यथार्थ से परिपूर्ण यह प्रदेश हमारी जन्मभूमि है और कर्मभूमि भी। अत: मां की गोद की तरह है और प्रदेश हमारा पालक है, इसलिए पिता के आश्रय की तरह है। गणपति ने शिव और पार्वती की परिक्रमा, वन्दना कर विश्वविजय का श्रेय प्राप्त किया था। शिव और पार्वती दो पृथक भौतिक रूप थे और माता-पिता थे। हमारा प्रदेश तो एक साथ एक रूप में माता-पिता दोनों हैं, अद्र्घनारीश्वर की तरह। प्रदेश से प्रेम और उसका विकास एक साथ पिता-माता दोनों से प्रेम और दोनों की सेवा है। अन्तत: प्रदेश से प्रेम स्वयं से प्रेम और प्रदेश का विकास स्वयं का विकास ही है। इसलिए संवेदनशील मुख्यमंत्री चाहते हैं कि प्रदेश के प्रति हमारी अनुभूतियों में ‘पितृदेवो भव‘ के भाव के साथ अनहद नाद हो, ‘मातृ देवोभव‘ के भाव का कल-कल नाद हो। यही भाव आनन्द का अनुभव बन सकता है। आनन्द है ही अनुभूति और अनुभूति देह के माध्यम से मन करता है। देह कष्ट में तो मन आनन्द में नहीं हो सकता। अत: प्रदेश की देह के कष्ट मिटाने होंगे। यह तब सम्भव है जब दरिद्रता का दामन छोड़े, शिक्षा का अविरल प्रवाह बुद्घि को प्रखर करे। सद्भाव की शबनम ताजगी पैदा करे, कर्म के लिए हर हाथ उठे, और संकल्प अटूट रहे। अपनी जन्मभूमि, अपनी कर्मभूमि, अपनी पुण्यभूमि, अपनी शक्ति और भक्ति की भूमि, अपने राजस्थान के गौरव, गरिमा, आत्म सम्मान और वैभव को विश्वास के साथ आकाश तक पहुंचाने के लिए ऊर्जापूर्ण सकारात्मक उन्माद पैदा करने का अवसर बना, वह 24 महीने का काल।
मुख्यमंत्री ने सभी के सहयोग से नये राजस्थान के निर्माण का रोड मैप तैयार कर उसे त्वरित गति से प्रभावी किया है। संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की वचनबद्घता को दोहराते हुए उन्होंने चुनावी घोषणा पत्र को शासन के पहले दिन से ही नये राजस्थान के निर्माण की कार्य योजना के रूप मेें स्वीकार कर प्रदेश को खुशहाल बनाने का संकल्प लिया है। प्रदेश के 35 लाख बीपीएल परिवारों की स्वास्थ्य रक्षा का जिम्मा मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष को सौंपा तो मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना के तहत 36 लाख गरीबों को दो रुपये प्रति किलो गेहँू मुहैया कराकर संवेदनशीलता का परिचय दिया है। एफोर्डेबल हाऊसिंग पॉलिसी हजारों गरीब परिवारों एवं वंचितों को सिर पर छतें देंगी तो दूरगामी कदम उठाकर प्रदेश का अंधेरा दूर कर घरों, खेतों और उद्योगों को आबाद करेगी विद्युत परियोजनाएं। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे के हाथ में स्लेट और किताब दिलायेगा तो महात्मा गांधी रोजगार गारन्टी कार्यक्रम बेरोजगारी दूर कर ग्रामीणों के हाथों में रोजगार थमा रही है। बीपीएल, अशक्त, वृद्घ एवं असहायों के लिए असंख्य हाथ और सरकार का खजाना तैयार और तत्पर बनाया गया। महिलाओं के सबल बनने के सभी उपाय कारगर बन रहे हैं।
खुशियों से भरपूर एक समर्थ, सक्षम एवं समृद्घ राजस्थान बनाने के ध्येय से राज्य के सर्र्वांगीण और समावेशी विकास का जो संकल्प मुख्यमंत्री की अगुवाई में राज्य सरकार ने लिया है, उसका उद्देश्य प्रदेशवासियों के जीवन को उत्तरोत्तर समृद्घ और खुशहाल बनाना और राज्य के विकास में योगदान के लिए सभी को अवसर प्रदान करना है।
जन समुदायों के समक्ष समय-समय पर मुख्यमंत्री ने अपनी सोच और अपने लक्ष्य को स्पष्ट किया है और अपने 24 माह के शासन काल में सरकार ने जनोन्मुखी, जन प्रेरित और जन आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य शैली को अपना कर प्रदेश को तरक्की के राह पर तेजी से आगे बढ़ाया है। उनकी यह मान्यता भी है कि विकास के कामों का दायित्व केवल सरकार का नहीं हो सकता, यह प्रत्येक दल, वर्ग, समूह और व्यक्ति का सामूहिक दायित्व है। समाज को विकास गतिविधियों से जोडऩे के लिए उन्होंने अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों का केन्द्र बिन्दु गांव और गरीब को बनाया है तो शहरी विकास को भी एक नई दिशा दी है। आशा ही नहीं विश्वास भी है कि हमारे पसीने की पुकार साकार होगी और हम शीघ्र ही नये राजस्थान के स्वर्णिम संसार में होंगे।
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