संपादकीय
सफल शासन : किसी सरकार के कार्यों की समीक्षा के लिए दो वर्ष का समय अधिक नहीं होता, विशेषकर ऐसी परिस्थितियों में जब गत शासन की गई खामियां उसे विरासत में मिली हों। इन खामियों को दूर करने में ही काफी समय निकल जाता है। इसके बावजूद राज्य की गहलोत सरकार हर क्षेत्र में विकास के कार्य कराने में पीछे नहीं रही। किसी भी राज्य के विकास एवं उन्नति के लिए मुख्यत: कुशल प्रशासन, बेहतर कानून व्यवस्था और शांति व सौहार्दपूर्ण वातावरण की जरूरत पड़ती है, क्योंकि जब तक राज्य का वातावरण सद्भावपूर्ण नहीं होगा, तब तक विकास में कई तरह के अवरोध आते रहते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबसे पहले इसी बात पर ध्यान दिया कि राज्य में शांति व सद्भाव का माहौल बना रहे, वह इसमें सफल भी रहे। सरकार बनाते ही मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रदेश में अमन-चैन कायम करने का बीड़ा उठाया और सामाजिक कड़वाहट को मिटाकर सभी वर्गों को एकजुट कर प्रदेश में विकास के पहिए को गतिशील बनाया। यह पहिया निरंतर प्रगति की ओर बढ़ रहा है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की विशेषता ये है कि वे लोगों को जितनी अच्छी तरह समझते हैं उससे ज्यादा अच्छी तरह लोग उन्हें जानते-समझते हैं। गहलोत हर कौम, हर धर्म और हर वर्ग की प्रतिष्ठा और उनकी संवेदनाओं को बखूबी जानते हैं। उनकी ये विशेषता उन्हें सबसे अलग करती है। सामाजिक समरसता व भाईचारे को उन्होंने अपना मूल मंत्र बना रखा है। इसी मूलमंत्र के बल पर वह प्रदेश को तरक्की के रास्ते पर निरंतर बढ़ाते चले जा रहे हैं। इस बात में किसी को भी कोई संदेह नहीं है कि दो साल के अपने कुशल व संवेदनशील शासन में गहलोत सरकार ने हर समस्या को बड़ी समझदारी से सुलझाया। कई समस्याएं तो मात्र समझाइश व बातचीत से ही हल हो गईं। गुर्जर आरक्षण एक ऐसा ही मुद्दा था, ये एक ऐसी समस्या थी जिसने केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश को प्रभावित कर दिया था। पर गहलोत ने जिस आत्मविश्वास से उन्हें शांत किया, वह एक मिसाल बन गई।
गहलोत सरकार अपने शासन के दो वर्ष पूरे कर चुकी है। इस दौरान सरकार की भरपूर कोशिश रही कि सभी वर्गों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले। पिछले दो वर्ष गवाह हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं का लाभ सबको समान रूप से मिला। बुजुर्गों को किसी तरह की तकलीफ नहीं हो, इस पर गहलोत सरकार ने विशेष ध्यान रखा। गहलोत का मानना है कि बुजुर्ग समाज की धरोहर होते हैं, उनके अनुभवों से सभी को लाभ उठाना चाहिए। राज्य सरकार के बीते दो वर्ष के शासन में संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की बदौलत हर हाथ को काम, हर बच्चे को शिक्षा, हर व्यक्ति को चिकित्सा और हर खेत व घर को बिजली-पानी मुहैया कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। इससे प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति का जन्म हुआ, जिसके सहारे प्रदेश निरंतर तरक्की के रास्ते पर बढ़ रहा है। इसके लिए राज्य की जनता भी साधुवाद की हकदार है, क्योंकि कई चुनौतियां आने के बावजूद भी उसने धैर्य नहीं खोया, हर समस्या के समाधान में शासन का पूरा साथ दिया, सरकारी कर्मचारी अपनी क्षमता से अधिक काम करते रहे, ऐसे में प्रदेश को आगे बढऩे से कौन रोक सकता है? (शिवम् मीडिया)
आकार लेता नया राजस्थान
जनता के विश्वास, शांति व सुशासन के दो साल
- यशवंत अग्रवाल
जनता की ओर से सौंपी गई बागडोर संभाले अशोक गहलोत सरकार ने दो साल पूरे कर लिए। प्रदेश की जनता बदलाव देख रही है। सामंती राज जाने के बाद इन दो वर्षों में राजस्थान में फिर से सामाजिक समरसता आई है। पांच साल तक पिछड़ा रहा प्रदेश अब नए राजस्थान के रूप में अंगड़ाई ले रहा है। किए गए वादों को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है।
राज्य की जनता के विश्वास से शांति एवं सुशासन के दो साल पूरे हो गए। विकास की पटरी से उतर गया प्रदेश अब फिर से करवट बदलकर नये राजस्थान का रूप ले रहा है। प्रगति का नया अध्याय शुरू हुआ है। लोगों में जागृति आई है। भाईचारे और खुशहाली के गीत गाए जा रहे हैं। भाजपा राज के पांच साल के कुशासन के दौरान बिखरा प्रदेश में सामाजिक ताना-बाना फिर से बुना गया है। सरकार और जनता के बीच सामाजिक समरसता में फिर से एक नई ताजगी आई है। इस ताजगी से प्रदेश की आबोहवा में खुशहाली घुली और विकास को नए पंख लग गए हैं। सुशासन से राज्य में कुदरत भी फिर से मेहरबान हो गई और पूरे राज्य को जमकर भिगोया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार की ओर से लिए गए जनकल्याणकारी एवं विकास कार्यों के फैसलों से प्रदेश के लोगों को एक जिम्मेदार सरकार होने का अहसास हुआ।
इन दो वर्षों के दौरान प्रदेश में कोई हिंसा नहीं हुई। पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल में गुर्जर एवं मीणा समुदाय में पैदा हुई कटुता अब कांग्रेस सरकार के दौरान आपसी सौहाद्र्र में बदल गई है। इस दौरान सरकार को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन राजनीतिक कौशल और सूझबूझ से बाधाएं स्वत: ही दूर हो गईं। गहलोत के इस दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस को रााजनीतिक तौर पर पांच बार बड़ी सफलताएं भी मिलीं। इससे यह भी साफ हो गया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस एवं अशोक गहलोत की नीतियों पर भरोसा करती है।
दो साल पहले अशोक गहलोत ने शपथ लेने से पहले मुख्यमंत्री चुने जाने के तुरंत बाद सवाई मानसिंह अस्पताल जाकर शराब दुखांतिका के पीडि़तों से मुलाकात कर यह जता दिया था कि प्रदेश में सामंती राज खत्म हो चुका है और आम आदमी की सरकार बन गई है। मुख्यमंत्री के रूप में गहलोत ने सामाजिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए शराब की दुकानों पर अंकुश लगाया। इसके अलावा कई अन्य ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनसे आमजन सीधे रूप से जुड़ा है। जमीनों का भ्रष्टाचार रोकने के लिए 90बी की कार्रवाई बंद कराई।
गहलोत ने सत्ता संभालते ही कांग्रेस के घोषणापत्र को अधिकारियों को सौंपते हुए इसे नीतिगत दस्तावेज मानते हुए अमल करने के निर्देश दिए थे। दो साल के दौरान घोषणापत्र में से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं पूरी कर दी गई हैं। कुछ घोषणाओं पर परीक्षण चल रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार अपनी घोषणाओं को पूरा करने में कोई कौर-कसर नहीं छोड़ेगी।
मुख्यमंत्री ने समय-समय पर अपने मंत्रिमंडल एवं अधिकारियों के साथ चिंतन बैठक कर सरकार के कामकाज की समीक्षा भी की। अपनी कमियों का पता लगाया और उन्हें दूर कर जनता को ज्यादा से ज्यादा राहत देने के उपाय खोजे। गहलोत ने प्रशासन गांवों की ओर अभियान फिर से शुरू कर ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा करने की दूसरी बार पहल की। इन शिविरों का गहलोत ने समय-समय पर अचानक निरीक्षण भी किया और कमियां मिलने पर कार्रवाई भी की। इससे लोगों का पता लग गया कि सरकार किसी काम में ढील नहीं आने देगी। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को इन शिविरों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी ताकि लोगों के काम हों।
गहलोत ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से लेकर एसडीएम और थानेदार तक को गांव में रात्रि विश्राम करने के निर्देश दिए ताकि अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच दूरियां कम हों और ग्रामीणों की समस्याओं का पता चल सके ताकि उनका समय पर निराकरण हो सके। राज्य में ऐसा पहली बार हुआ कि मुख्य सचिव ने गांव में रात को अपना डेरा डालकर गांववालों के दुख-दर्द सुने।
मुख्यमंत्री की नैतिकता, संयम और संवेदनशीलता भी किसी से छिपी नहीं है। रणथंभौर में बाघ के हमले से घायल रेंजर की जान बचाने के लिए अपनी यात्रा टालकर सरकारी हैलीकॉप्टर से रेंजर को जयपुर लाने का मामला हो या शिक्षिका की पिटाई से आंख खराब होने वाली छात्र के दुख-दर्द मालूम करने और सरकारी खर्च पर उसका इलाज कराने की बात हो या पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने अथवा वसुंधरा राजे के मिलने पर बहन कहकर संबोधित करने की सहृदयता अशोक गहलोत ने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के हर मौके पर दिखाई। कांग्रेस की सरकार ने ही गांवों की सरकार को उनके अधिकार सौंपे। भाजपा सरकार पांच साल तक पंचायती राज को मजबूत करने का झुनझुना बजाती रही, लेकिन कुछ करने के बजाय गांव की सरकारों को पंगु बनाती रही। गहलोत सरकार ने गांधी जयंती पर गांवों की सरकार को पांच विभाग कृषि, प्रारंभिक शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सौंपकर ढेर सारे अधिकार दे दिए। इससे संविधान की मूल भावना के अनुरूप ग्राम पंचायतें मजबूत हुई हैं।
विकास की नई अवधारणा : बात नये राजस्थान के निर्माण की हो या नीतियों और कामकाज की। विकास की नई अवधारणा के साथ राज्य सरकार ने दो साल में कई महत्वपूर्ण काम किए। इनमें राज्य आयोजना बोर्ड का गठन, मौसम आधारित फसल बीमा योजना शुरू करना, पशु प्रजनन नीति, नरेगा योजना में सामाजिक अंकेक्षण निदेशालय का गठन, वन नीति, पर्यावरण नीति, कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि व्यवसाय प्रोत्साहन नीति, पशुधन विकास नीति, जल नीति, इको ट्यूरिज्म नीति, बायोमास नीति, औद्योगिक एवं निवेश नीति, टाउनशिप पॉलिसी जारी कर दी गई। राजीव गांधी मिशनों की स्थापना हुई। हरेक शहर एवं गांवों का डवलपमेंट प्लान बनाने का फैसला, जयपुर को वल्र्ड क्लास सिटी बनाने के लिए मेट्रो रेल परियोजना का क्रियान्वयन, शहरों में सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने के लिए अफोर्डेबल आवास नीति जारी, मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष एवं अल्पसंख्यक मामलात विभाग और ग्राम न्यायालयों की स्थापना, मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना के तहत बीपीएल परिवारों को दो रुपए किलो की दर से गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है।
न बिजली का संकट, न पैसे का : गहलोत सरकार के दो साल में प्रदेश की जनता को बिजली संकट से रूबरू नहीं होना पड़ा। किसानों सहित उद्योगों एवं घरेलू स्तर पर लगातार बिजली दी गई। इस दौरान बिजली उत्पादन बढ़ाने के ठोस प्रयास कर ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए इस साल के बजट में 52 फीसदी राशि रखी गई है। राज्य में 23760 करोड़ रुपए की लागत से तीन नए सुपर क्रिटिकल ताप बिजलीघर छबड़ा, सूरतगढ़ व बांसवाड़ा में स्थापित किए जा रहे हैं। पेयजल परियोजनाओं पर 2227 करोड़ 70 लाख रुपए खर्च किए गए हैं जबकि सडक़ों के विकास पर 3910 करोड़ रुपए व्यय हुए हैं। दो साल में 40837 बेरोजगारों को नौकरियां दी गई हैं। कानून व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है। राज्य कर्मचारियों के हित में कई फैसले लिए गए हैं।
दो साल में पांच बड़ी सफलताएं :मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस को दो साल में राजनीतिक रूप से पांच बड़ी सफलताएं मिली हैं। सबसे पहली सफलता लोकसभा चुनावों में मिली। इनमें भाजपा का सूपड़ा साफ करते हुए प्रदेश के मतदाताओं ने यह साबित कर दिया कि जातिवाद और धर्म-संप्रदाय के नाम पर चुनाव लडऩे वाली भाजपा देश की बागडोर नहीं संभाल सकती। इसके बाद विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा आपसी द्वंद्वों एवं वसुंधरा राजे सरकार के कुशासन के कारण लोगों का विश्वास जीतने में कामयाब नहीं हो सकी और बराबरी पर संतोष करना पड़ा। पिछले साल हुए निकाय चुनाव के पहले चरण में कांग्रेस ने बड़ी सफलता हासिल कर भाजपा को पीछे धकेल दिया। इन चुनावों में प्रदेश के मतदाताओं ने यह बता दिया कि शहरों का विकास भी केवल कांग्रेस ही कर सकती है। चौथी बड़ी सफलता के रूप में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में भी अशोक गहलोत का जादू चला और कांग्रेस को बहुमत मिला। पंचायत चुनाव में मिली सफलता से यह तय हो गया कि गांव के लोग भी गहलोत सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों में भरोसा करते हैं। इस साल अगस्त में हुए निकाय चुनाव के दूसरे चरण में भी भाजपा को घाटा उठाना पड़ा। कांग्रेस ने भाजपा से 16 निकाय छीन लिए। दो साल पहले सत्ता से बाहर हुई भाजपा आज भी हाशिये पर खड़ी है। उसके सहयोगी संगठनों के चेहरे लोगों के सामने आ रहे हैं।
(शिवम् मीडिया)

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