शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

गौरव साहब ! बालोतरा को भी संभालो

गौरव साहब ! बालोतरा को भी संभालो
सप्ताह का एक दिन हमें भी दो!
बालोतरा। बाड़मेर जिले मे नकली घी माफियाओं, शराब तस्करों के खिलाफ सख्त व अनुशासित कार्यवाही करने वाले युवा जिला कलेक्टर गौरव गोयल की चारों तरफ तारीफ-ही-तारीफ हुई। गौरव साहब हाल ही में आपके द्वारा बाड़मेर शहर मे शराब बंदी के नियमों की पालना के लिए की गई कार्यवाही का असर बालोतरा में भी देखने को मिल रहा है। बालोतरा के लोगों ने साहब की मुक्तकंठ प्रशंसा की है। अनुशासन प्रिय जिला कलेक्टर साहब औद्योगिक नगरी बालोतरा भी आपके ही जिले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सप्ताह में एक दिन भी यदि आप बालोतरा भ्रमण कर यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं पर नजर डालेगें तो आम शहर वासी राहत महसूस करने लगेगें, इसमे कोई शक की गुंजाईश नहीं है। जब जिला मुख्यालय पर आपके कानून प्रिय रवैये से हुई कार्यवाही को लेकर यूं ही बालोतरा मे व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर दोषी लोग डरने लगे है। तो आप खुद आकर यदि एक-आध बार जनता के दु:ख-दर्द सुनेगें तो निश्चित रूप से आमजन को राहत मिलेगी।
कलेक्टर साहब! उद्योगों की दृष्टि से महत्वपूर्ण नगरी बालोतरा में भूमाफियाओं का बोलबाला है। शहर मे गरीब आदमी जितना महंगाई की मार से परेशान नहीं है, उससे कहीं गुना ज्यादा भयग्रस्त इसलिए रहता है कि कहीं कोई भूमाफिया उसकी जिन्दगी भर की कमाई से खरीदे गए भूखण्डों पर नाजायज कब्जा न कर लें। क्यों कि शहर मे आम-आदमी की आवाज को सुनने वाले रक्षक ही भक्षक बन बैठे है। ऐसे मे सहायता के लिए गरीबों हाथ अब आपकी ओर ही उठ रहे है। यहां प्रभावशाली लोग गरीबों को उनके घरों से दर-ब-दर कर जमीनों पर कब्जा कर बेच रहे है। ऐसे कई उदाहरण समाचार पत्रों के माध्यम से सामने आ चुके है। जिससे सुनकर आधुनिक कहलाने वाला समाज शर्मसार हो रहा है। सत्ता का सुख भोग रहे नेता बेलगाम हो गए है और उनकी छत्र छाया मे भू-माफियां गरीब लोगों व पालिका की करोड़ो रूपयो की कीमती जमीन को जबरदस्ती हड़प रहे है और पता तक नहीं हिलने देते है। शहर मे अनेक छोटे-बड़े भूमाफिया गरीबों के खरीदशुदा भूखण्डों के फर्जी इकरारनामा तैयार कर अनेको प्लॉट हड़पे है। लेकिन आज सत्ता मे बैठे लोग भी इस तरह के भूमाफियों को अपना संरक्षण प्रदान कर रहे है। तो ऐसी स्थिति मे उनकी सहायता आपके ऊपर ही टिकी हुई है। हैरान-परेशान गरीब लोगों की शिकायतें भी अधिकारी रद्दी की टोकरी मे डाल रहे है। परेशान लोगों की आवाज को आप तक नहीं पहुंचने दिया जा रहा है। इसलिए आवश्यक है कि आप स्वयं उपखण्ड मुख्यालय पर महिने मे कुछ दिनो के लिए केम्प कर जन सुनवाई करें तो आपको खुद को बालोतरा उपखण्ड में व्याप्त समस्याओं के अम्बार की जानकारी सहज ही हो जाएगी। आप पर स्वयं मुख्यमंत्री नाज करते है, ऐसे में उपखण्ड के आम अवाम् की आवाज यही कह रही है कि साहब हमारे भी दु:ख दर्द सुनो।
यहां की नगरपालिका की रग-रग मे इतना भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है कि पीडि़त लोगों ने इसका नाम ही बदलकर नरकपालिका कहना शुरू कर दिया है। छोटे से काम के लिए भी बिना भेंट चढावा दिए दरख्वास्त टेबल से आगे नहीं बढ़ती है। गरीब लोग पट्टो के लिए कई वर्षो से फाईल लगाने के बावजूद भी तरस रहे है तो वजनदार फाईलें हाथो-हाथ पास हो रही है। अधिकारी भ्रष्टाचार कर बिना सोचे-समझें और पूरी जानकारी जुटाये आंख बंद कर पट्टो की रेवडियां बांट रहे है। लोगों को पट्टो की दरख्वास्त में सरकारी फीस जमा कराये बरसों बीत रहे है लेकिन पट्टे नहीं मिल रहे है। बालोतरा के आस-पास की कृषि भूमि को भी भूमाफियाओं ने नहीं बक्सा है और उन पर अवैद्य तरीके से बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बना रखी है। सत्ता मे रहने वाले पालिका की खाली पड़ी जमीन पर जबरदस्ती अतिक्रमण कर रहे है पर उनके खिलाफ कार्यवाही करने वाला कोई नहीं है।
साहब! यहां की लूणी नदी जबरदस्त अतिक्रमण की चपेट में है। नदी के बीचोबीच भूमाफियाओं ने बड़ी-बड़ी बिल्डींग बना रखी है। जल माफियाओं ने मारवाड़ की गंगा कही जाने वाली लूणी नदी की कोख को उधेड़ कर रख दिया है। लूणी नदी के किनारे हो रहे अंधाधुंध जल दोहन से जल माफिया तो चांदी काट कर रहे है तो धरती पुत्र किसान, जमीन में सूख चूके पानी को लेकर चिन्ता मे डूबे रहते है। प्रशासन की नकेल नहीं होने से जल माफियाओं ने किसानों की दो जून की रोटी पर प्रश्न खड़ा कर दिया है। नदी मे गौशाला के नाम पर प्रभावशाली लोग बड़ा व्यापार कर रहे है। शिकायते हो रही है पर कार्यवाही कोसों दूर तक भी नजर नहीं आ रही है।
कलेक्टर साहब बालोतरा उपखण्ड मे सरकार द्वारा चलाये जा रहे शुद्ध के लिए अभियान ने भी शायद दम तोड़ दिया है। शहर मे धड़ल्ले से नकली घी बनने व इस रेकेट के तार बड़े शहरों से जुड़े होने की जानकारियां आये दिन सामने आती है, पर रसद विभाग महज ठेले और छोटे व्यापारियों को परेशान कर कत्र्तव्यों की इति कर लेते है। औद्योगिक नगरी होने के कारण शहर में खाने-पीने संबंधी कई बड़े प्रतिष्ठान है, लोग सुबह उठते ही शुद्ध दूध के जगह मिलावट वाले दूध की चाय पीने को मजबूर है, परंतु आज तक किसी भी दूधिये का सैम्पल नहीं लिया गया। यह भी जानकारी मिलती रहती है कि शहर मे सिन्थेटिक मावा बनाने का काम भी जोरों पर है, लेकिन उनके खिलाफ कौन कार्यवाही करे?
गौरव साहब..अब लॉ ऑर्डर की बात की जाए तो आपको मीडिया के माध्यम से पता चल ही गया होगा कि शहर के लोग बढ़ती चोरियों से परेशान है तो दुकानों मे खुले आम चल रहे सट्टो के जाल मे फंसकर शहर की युवापीढी बर्बाद हो रही है। पुलिस की आंख के नीचे अपराध हो रहा है और पुलिस हमेशा खैरियत का राग अलापती है। साहब हाल ही मे यहां के द्वितीय रेलवे फाटक पर फिल्मी स्टाईल मे गुण्डों की तरह नकाबपोश धारियों ने एक युवक पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर सनसनी फैला दी, जिससे लोग डर के मारे सहमे हुए है और रात को घर से निकलने मे कतराने लगे है। अनुशासनप्रिय गौरव साहब यहां की पुलिस मानो कुंभकर्णी नींद मे है और चोर दिन दहाड़े चोरियों को अंजाम देने से नहीं चूकते है।
शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर गौरव साहब आप पुलिस अधीक्षक के साथ बिना सूचना दिए शहर का भ्रमण करेगें तो निश्चित रूप से आप और पुलिस अधीक्षक की नजरों के सामने यहां की यातायात व्यवस्था का आलम सामने आने से इसके सुधार के आप प्रयास कर सकेगें।
गौरव साहब अब तो बालोतरा की कमान भी आप ही के समान एक युवा और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के हाथ में है। दोनों युवा अधिकारियों का अच्छा तालमेल शहर में हो रहे अपराधों, भूमाफियाओं पर लगाम, सट्टेबाजी रोकथाम, लूणी नदी मे अतिक्रमण सहित शहर की प्रमुख समस्याओं से लोगों को निजात दिलाने में बेहद मददगार साबित होगा, इसमें कोई शक नहीं है।




1 टिप्पणी:

  1. गौरव गोयल नया है और जवानी के जोश मैं यह सब कर रहा है। अभी जब इसके फटके पड़ेंगे ना, तब सुधर जायेगा।

    जवाब देंहटाएं