मुख्यमंत्री जी, फीडबेक लेना हैं तो बाड़मेर से शुरूआत करें
एक भूखण्ड दो पट्टे, पति का पट्टा कोडिय़ों के दाम!
संवेदनशील एवं लोकप्रिय मुख्यमंत्री के सामने भ्रष्ट नौकरशाह और इनके सरंक्षक जनप्रतिनिधि जो फीड बेक दे रहे हैं वह उन्हें गुमराह करने वाली तस्वीर के सिवाय कुछ नही हैं? वास्तविक फीडबेक लेना हैं तो बाड़मेर की भ्रष्ट, बदनाम एवं कलंकित नगरपालिका से लें। जहां कानून कायदों को खुली तिलांजलि, दादागिरि और रिश्वतखोरी का नंगा नाच हो रहा हैं। शर्मनाक सच तो यह हैं कि यहां कांग्रेस का बोर्ड हैं जो आप जैसे कुशल, जनप्रिय, ईमानदार और पारदर्शिता के हामी मुख्यमंत्री की छवि पर कालिख पोत रहा हैं।
‘गरीबों पर कहर, अमीरों पर रहम’
बाड़मेर। नगरपालिका अध्यक्षा एवं आयुक्त ने एक भूखण्ड के दोहरे पट्टे देकर यह साबित करने का दुसाहस किया हैं कि यहां ‘गरीबों पर कहर और अमीरों पर रहम’ किया जाता हैं। शहर के खसरा नंबर 1258/2/एवं 2581/1258 मे कांग्रेस शासित पूर्व पालिका बोर्ड ने अधिसूचित कच्ची बस्ती वाले इस इलाके मे 1991 से सपरिवार आबाद कईं परिवारों को नियमन कर पट्टे दिए थे। लेकिन इसी जमीन पर वर्तमान चेयरमेन एवं आयुक्त ने यहां के एक बड़े उद्यमी एवं चेयरमेन पति के कारोबारी दोस्त को दोहरे पट्टे जारी कर दिए। पिछले सप्ताह यहां के आयुक्त मय पुलिस बल के मौके पर चेयरमेन पति के दोस्त को कब्जा दिलाने पहुंच गये लेकिन वहां के सैकड़ों लोग सडक़ों पर सामने उतर आये और उन्हें दबे पांव वापस लौटना पड़ा।
मुख्यमंत्री जी! एक तरफ आप गरीबों को बसाने की कवायद मे जुटे हुए हैं तो दूसरी तरफ आपके शासन मे ऐसे भ्रष्ट अफसर और चेयरमेन खून पसीने की गाढी कमाई से भूखण्ड खरीद कर पट्टासुदा प्लॉट पर मकान बना कर रहने वाले गरीबों को उजाडऩे का षडय़ंत्र अमीरों के साथ रच कर आखिर क्या साबित करना चाह रहे हैं?
पति को कोडिय़ों के दाम पट्टा, खुद चेयरमेन भागीदार
शहर के समीप खसरा नंबर 491/42 एवं 496/43 की 10 बीघा जमीन का बेचान स्वंय अपने पति मांगीलाल जैन के नाम कर पालिका अध्यक्षा उषा जैन ने उसका पट्टा कोडिय़ों के दाम जारी कर दिया। यह पट्टा रिषभ क्लब एवं रिसोर्ट के निर्माण के लिए दिया गया हैं जिसमें स्वंय चेयरमेन उषा जैन 20 फीसदी भागीदार हैं। इस जमीन के कनवर्जन के लिए पालिका के ही अधिशाषी अभियंता ने करीब 45 लाख रूपये की राशि कॉमर्शियल शुल्क के रूप मे निर्धारित की थी लेकिन बाद मे यह राशि घटा कर सिर्फ डेढ लाख रूपये कर दी गई।
मुख्यमंत्री जी! जिस फर्म मे स्वंय चेयरमेन भागीदार हो और खुद चेयरमेन ने जिस जमीन का अपने पति के नाम बेचान कर दिया हो, क्या वह कोडिय़ों के दाम तो दूर पूरे दामों पर भी पट्टा जारी करने का अधिकार रखती हैं? नगरपालिका नियमों मे इसकी मनाही के बावजूद भी चेयरमेन ने अपने पति के नाम पट्टा जारी कर दिया, लेकिन आला अफसर इस मामले मे मूकदर्शक बने रहे।
बिल्डिंग बन गई, इजाजत बाद मे
नगरपालिका नियमों के तहत किसी तरह की बिल्डिंग और वह भी बहुमंजिला करोड़ों की लागत वाली बिल्डिंग बन जाये और इसके बाद निर्माण स्वीकृति ले, ये कहां तक उचित हैं? खुद नगरपालिका चेयरमेन के रहते उनके पति मांगीलाल न खसरा नंबर 491/42 एवं 496/43 की जमीन पर बहुमंजिला रिसोर्ट एवं होटल बना दिया लेकिन बाद मे इजाजत ली। चेयरमेन पति ने इजाजत के खिलाफ खुलेआम बेखौफ निर्माण करवा दिया। लेकिन पालिका आयुक्त एवं दूसरे अफसर पूरे मामले मे आंखे मूंद कर बैठे हुए हैं।
अधिसूचित कच्ची बस्तियों मे माफियाओं के नाम कृषि भूमि के पट्टे
बाड़मेर नगरपालिका के वर्तमान बोर्ड की अध्यक्षा एवं आयुक्त ने अधिसूचित की गई नगरपालिका की कच्ची बस्तियों मे सैकड़ों की संख्या मे खाली पड़ी जमीन को कृषि भूमि बताते हुए माफियाओं के नाम पट्टे जारी करने मे भी कोई कसर नही छोड़ी। राज्य सरकार ने अधिसूचित कच्ची बस्तियों मे कट ऑफ डेट 2004 तक कब्जा कर वहां आबाद रह रहे लोगों को तमाम सबूतों व सर्वे के बाद 150 वर्गगज के मकान का पट्टा देने के आदेश दे रखे हैं। शहर की कुल 16 कच्ची बस्तियां अधिसूचित हैं जहां मई 2005 मे पालिका द्वारा करवाई गई वीडियोग्राफी के मुताबिक हजारों बेशकीमती भूखण्ड खाली पड़े थे। यह जमीन अरबों की कीमत की हैं जिस पर सिर्फ पालिका का स्वामित्व बनता हैं। लेकिन इस चेयरमेन एवं आयुक्त ने मिल कर अरबों की खाली पड़ी पालिका की उक्त जमीनों के पट्टे कृषि भूमि बताते हुए माफियाओं के नाम जारी कर दिए। लेकिन फिर भी कोई अफसर इनके खिलाफ कार्यवाही का साहस जुटा नही पा रहा हैं।
कलक्टर के आदेश के बाद भी जांच अधिकारी रिकॉर्ड के लिए भटक रहा हैं
गलत एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टे देने के मामले मे यहां के जिला कलक्टर गौरव गोयल ने पिछले महिने गुड़ामालानी के उपखण्ड अधिकारी सी.एल. देवासी को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच अधिकारी ने नगरपालिका प्रशासन से उसी वक्त रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने का पत्र एवं फोन के जरिए आग्रह किया लेकिन वास्तविकता यह हैं कि पालिका प्रशासन ने इस जांच अधिकारी को आज तक रिकॉर्ड नही दिया और न ही जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड कब्जे मे लेकर जांच शुरू करने की जरूरत समझी।
करोड़ों की वसूली कागजों मे अटकाई
एक तरफ आर्थिक तंगी और बदहाली का रोना रोया जा रहा हैं तो दूसरी तरफ बाड़मेर नगरपालिका करोड़ों की राजस्व वसूली कागजों मे अटकाए बैठी हैं। हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने 2005 मे आदेश जारी कर गलत ढंग से किए गये करीब 276 नियमनों के मामले मे बकाया 65 लाख से अधिक की वसूली की हिदायत दी थी लेकिन नगरपालिका ने एक प्रकरण मे भी आज तक वसूली नही की। इसी तरह बाड़मेर शहर मे अवैध रूप से बनी होटलों के मामले मे फाइलों मे 20 लाख और कुछ विचाराधीन होटल प्रकरणों मे जिनसे दो करोड़ से अधिक की वसूली बनती हैं वह भी नही की जा रही हैं। कईं मामलों मे तो अध्यक्षा खुद फाइलों पर कुण्डली मार की बैठी हुई हैं क्यों कि होटल मालिक चेयरमेन पति के कारोबारी दोस्त हैं।
आयुक्त के मकान के सामने नपा की 50 लाख की जमीन पर दुकानों का अवैध निर्माण
वर्तमान आयुक्त के मकान के ठीक सामने मठ के बाहर नगरपालिका के स्वामित्व की 50 लाख से अधिक की कीमत की जमीन पर दो महिने पहले जबरन दुकानों की कतार खड़ी करवा दी गर्ई। लेकिन आयुक्त आंखे मूंद कर बैठे रहे। मौहल्लेवासियों ने कलक्टर को शिकायत की तो आयुक्त ने जवाब दिया कि शिकायत बाद मे हुई हैं? अब तहसीलदार ही इसे हटा सकता हैं? जिला कलक्टर ने पिछले दिनों इस अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दे चुके हैं लेकिन आयुक्त ने हटाने के बजाय निर्माणकर्ताओं को दुकानों के बाहर खाली पड़ी नगरपालिका की जमीन पर नये सिरे से ओटों का निर्माण करवाने की छूट दे दी। इस जमीन पर दो साल पहले फिर माफियाओं ने निर्माण करवाने की कोशिश की थी लेकिन उस वक्त अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त करवा लिया गया था। इस तरह आयुक्त के मकान के ठीक सामने पालिका की 50 लाख कीमत की जमीन पर अवैध दुकानों का निर्माण हो गया, लेकिन वे जवाब देने के सिवाय कुछ नही कर पाये? आखिर क्यों? साफ हैं कि दाल मे काला हैं। दुकानों का अवैध निर्माण उनके घर मे सामने हो और उनके जवाब के मुताबिक हटाने की कार्यवाही तहसीलदार करे, आखिर ऐसा क्यों?
चोरी का आरोपी बाबू, अध्यक्ष का माध्यम
मौजूदा अध्यक्षा ने अपने पास ऑफिस की महत्वपूर्ण फाइलें तलब करने के लिए एक ऐसे कनिष्ठ लिपिक को माध्यम बना रखा हैं जिसके विरूद्व इसी नगरपालिका की महतवपूर्ण फाइलें एवं नक्शे चुराने, रिकॉर्ड मे हेराफेरी करने जैसे गंभीर आरोपों का मामला न्यायालय मे लम्बित हैं। वहीं पिछले 10 महिनों से वह बिना छुट्टी दिए पालिका से गायब रहा। ऐसे लिपिक को अपना माध्यम बना कर पालिका अध्यक्ष अपने खोटे एवं गलत कार्यो को अंजाम देने पर तुली हुई हैं। जो आयुक्त के अन्तिम आदेशों के बावजूद भी अपनी टिप्पणी कर अध्यक्षा को आदेश के लिए फाइल भेजने का काम कर रहा हैं। इस तरह महत्वपूर्ण फाइलें चोरी के आरोपी बाबू के माध्यम से आज भी पालिका मे बेखौफ निष्पादित की जा रही हैं। हो सकता हैं इस आरोपी बाबू की फाइल पर टिप्पणी या हस्ताक्षर ही कोई बड़ी रकम बतौर रिश्वत वसूलने का कोड वर्ड हो?
आर.ए.एस. की जगह भ्रष्ट राजस्व अधिकारी आयुक्त क्यों?
वर्तमान राज्य सरकार की नीति एवं आदेशों के तहत बाड़मेर नगरपालिका मे आर.ए.एस. अधिकारी को बतौर आयुक्त नियुक्त किया जाने का प्रावधान हैं। लेकिन बाड़मेर मे कुछ समय बाद ही उक्त भ्रष्ट राजस्व अधिकारी क ालूखां सलावट को आयुक्त पद पर तैनात क्यों किया गया? इस राजस्व अधिकारी को पिछले कार्यकाल मे बाड़मेर मे ही सस्पेंड कर भेजा जा चुका हैं। इसके विरूद्व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मे भी कईं मामलें लम्बित चल रहे हैं। कईं मामलों मे विभागीय जांचें भी लम्बित हैं तो ऐसे भ्रष्ट राजस्व अधिकारी को बाड़मेर मे आर.ए.एस. की जगह आयुक्त की तैनातगी आखिर क्यों की गई? क्या यह उचित और जायज हैं?
सूचना के अधिकार पर कुण्डली
एक तरफ आप स्वंय पारदर्शिता की नसीहत दे रहे हैं तो दूसरी तरफ यहां की नगरपालिका के आयुक्त एवं अध्यक्ष दोनों अपनी करतूतों को ढकने का दुसाहस कर रहे हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इनके पास एक नही सैकड़ों आवेदन और अपीलें लम्बित पड़ी हैं लेकिन ये कोई फैसला नही करते। किन्ही मामलों मे सूचना दी जाती हैं तो दूसरे प्रकरणों की, जिससे आवेदक को कोई सरोकार नही रहता। खुद राज्य सूचना आयोग भी इनकी हरकतों से तंग और हैरान हैं। यहां की अध्यक्षा ने आज दिन तक एक भी अपील का सूचना अधिनियम के तहत निस्तारण नही किया न सुनवाई की कोशिश की।
पनप रहा हैं अवैध कॉलोनियों का गौरख धंधा
पिछले दिनों बाड़मेर दौरे पर आये स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल ने पालिका अध्यक्ष एवं आयुक्त को स्पष्ट पाबंद किया था कि शहर के ईर्द गिर्द कोई भी अवैध कॉलोनी नही कटे लेकिन मंत्री के इस आदेश का भी इन पर कोई असर नही पड़ा। शहर मे दर्जनों कॉलोनियां बिना कनवर्जन धड़ल्ले से कट रही हैं। खुले मे विज्ञापन प्रचारित किए जा रहे हैं कि भूखण्ड खरीदने पर कनवर्जन करवा कर दिया जायेगा और ये ईनामी योजनाओं के झांसे मे ग्राहकों को फंसा रहे हैं। स्वंय पालिका अध्यक्षा के रिश्तेदार इन अवैध कॉलोनियों के कॉलोनाइाजर बने हुए हैं। आश्चर्य तो इस बात का हैं कि बाड़मेर नगरपालिका ने किसी भी निजी डवलपर्स और कॉलोनाइजर्स का पंजीकरण अपने यहां नही कर रखा हैं जिससे नगरपालिका को लाखों की राजस्व से हाथ धोना पड़ रहा हैं।
फोटो होटल- बाड़मेर: चेयरमेन पति द्वारा निर्मित बहुचर्चित ऋषभ रिसोर्ट एण्ड क्लब
संवेदनशील एवं लोकप्रिय मुख्यमंत्री के सामने भ्रष्ट नौकरशाह और इनके सरंक्षक जनप्रतिनिधि जो फीड बेक दे रहे हैं वह उन्हें गुमराह करने वाली तस्वीर के सिवाय कुछ नही हैं? वास्तविक फीडबेक लेना हैं तो बाड़मेर की भ्रष्ट, बदनाम एवं कलंकित नगरपालिका से लें। जहां कानून कायदों को खुली तिलांजलि, दादागिरि और रिश्वतखोरी का नंगा नाच हो रहा हैं। शर्मनाक सच तो यह हैं कि यहां कांग्रेस का बोर्ड हैं जो आप जैसे कुशल, जनप्रिय, ईमानदार और पारदर्शिता के हामी मुख्यमंत्री की छवि पर कालिख पोत रहा हैं।
‘गरीबों पर कहर, अमीरों पर रहम’
बाड़मेर। नगरपालिका अध्यक्षा एवं आयुक्त ने एक भूखण्ड के दोहरे पट्टे देकर यह साबित करने का दुसाहस किया हैं कि यहां ‘गरीबों पर कहर और अमीरों पर रहम’ किया जाता हैं। शहर के खसरा नंबर 1258/2/एवं 2581/1258 मे कांग्रेस शासित पूर्व पालिका बोर्ड ने अधिसूचित कच्ची बस्ती वाले इस इलाके मे 1991 से सपरिवार आबाद कईं परिवारों को नियमन कर पट्टे दिए थे। लेकिन इसी जमीन पर वर्तमान चेयरमेन एवं आयुक्त ने यहां के एक बड़े उद्यमी एवं चेयरमेन पति के कारोबारी दोस्त को दोहरे पट्टे जारी कर दिए। पिछले सप्ताह यहां के आयुक्त मय पुलिस बल के मौके पर चेयरमेन पति के दोस्त को कब्जा दिलाने पहुंच गये लेकिन वहां के सैकड़ों लोग सडक़ों पर सामने उतर आये और उन्हें दबे पांव वापस लौटना पड़ा।
मुख्यमंत्री जी! एक तरफ आप गरीबों को बसाने की कवायद मे जुटे हुए हैं तो दूसरी तरफ आपके शासन मे ऐसे भ्रष्ट अफसर और चेयरमेन खून पसीने की गाढी कमाई से भूखण्ड खरीद कर पट्टासुदा प्लॉट पर मकान बना कर रहने वाले गरीबों को उजाडऩे का षडय़ंत्र अमीरों के साथ रच कर आखिर क्या साबित करना चाह रहे हैं?
पति को कोडिय़ों के दाम पट्टा, खुद चेयरमेन भागीदार
शहर के समीप खसरा नंबर 491/42 एवं 496/43 की 10 बीघा जमीन का बेचान स्वंय अपने पति मांगीलाल जैन के नाम कर पालिका अध्यक्षा उषा जैन ने उसका पट्टा कोडिय़ों के दाम जारी कर दिया। यह पट्टा रिषभ क्लब एवं रिसोर्ट के निर्माण के लिए दिया गया हैं जिसमें स्वंय चेयरमेन उषा जैन 20 फीसदी भागीदार हैं। इस जमीन के कनवर्जन के लिए पालिका के ही अधिशाषी अभियंता ने करीब 45 लाख रूपये की राशि कॉमर्शियल शुल्क के रूप मे निर्धारित की थी लेकिन बाद मे यह राशि घटा कर सिर्फ डेढ लाख रूपये कर दी गई।
मुख्यमंत्री जी! जिस फर्म मे स्वंय चेयरमेन भागीदार हो और खुद चेयरमेन ने जिस जमीन का अपने पति के नाम बेचान कर दिया हो, क्या वह कोडिय़ों के दाम तो दूर पूरे दामों पर भी पट्टा जारी करने का अधिकार रखती हैं? नगरपालिका नियमों मे इसकी मनाही के बावजूद भी चेयरमेन ने अपने पति के नाम पट्टा जारी कर दिया, लेकिन आला अफसर इस मामले मे मूकदर्शक बने रहे।
बिल्डिंग बन गई, इजाजत बाद मे
नगरपालिका नियमों के तहत किसी तरह की बिल्डिंग और वह भी बहुमंजिला करोड़ों की लागत वाली बिल्डिंग बन जाये और इसके बाद निर्माण स्वीकृति ले, ये कहां तक उचित हैं? खुद नगरपालिका चेयरमेन के रहते उनके पति मांगीलाल न खसरा नंबर 491/42 एवं 496/43 की जमीन पर बहुमंजिला रिसोर्ट एवं होटल बना दिया लेकिन बाद मे इजाजत ली। चेयरमेन पति ने इजाजत के खिलाफ खुलेआम बेखौफ निर्माण करवा दिया। लेकिन पालिका आयुक्त एवं दूसरे अफसर पूरे मामले मे आंखे मूंद कर बैठे हुए हैं।
अधिसूचित कच्ची बस्तियों मे माफियाओं के नाम कृषि भूमि के पट्टे
बाड़मेर नगरपालिका के वर्तमान बोर्ड की अध्यक्षा एवं आयुक्त ने अधिसूचित की गई नगरपालिका की कच्ची बस्तियों मे सैकड़ों की संख्या मे खाली पड़ी जमीन को कृषि भूमि बताते हुए माफियाओं के नाम पट्टे जारी करने मे भी कोई कसर नही छोड़ी। राज्य सरकार ने अधिसूचित कच्ची बस्तियों मे कट ऑफ डेट 2004 तक कब्जा कर वहां आबाद रह रहे लोगों को तमाम सबूतों व सर्वे के बाद 150 वर्गगज के मकान का पट्टा देने के आदेश दे रखे हैं। शहर की कुल 16 कच्ची बस्तियां अधिसूचित हैं जहां मई 2005 मे पालिका द्वारा करवाई गई वीडियोग्राफी के मुताबिक हजारों बेशकीमती भूखण्ड खाली पड़े थे। यह जमीन अरबों की कीमत की हैं जिस पर सिर्फ पालिका का स्वामित्व बनता हैं। लेकिन इस चेयरमेन एवं आयुक्त ने मिल कर अरबों की खाली पड़ी पालिका की उक्त जमीनों के पट्टे कृषि भूमि बताते हुए माफियाओं के नाम जारी कर दिए। लेकिन फिर भी कोई अफसर इनके खिलाफ कार्यवाही का साहस जुटा नही पा रहा हैं।
कलक्टर के आदेश के बाद भी जांच अधिकारी रिकॉर्ड के लिए भटक रहा हैं
गलत एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टे देने के मामले मे यहां के जिला कलक्टर गौरव गोयल ने पिछले महिने गुड़ामालानी के उपखण्ड अधिकारी सी.एल. देवासी को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच अधिकारी ने नगरपालिका प्रशासन से उसी वक्त रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने का पत्र एवं फोन के जरिए आग्रह किया लेकिन वास्तविकता यह हैं कि पालिका प्रशासन ने इस जांच अधिकारी को आज तक रिकॉर्ड नही दिया और न ही जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड कब्जे मे लेकर जांच शुरू करने की जरूरत समझी।
करोड़ों की वसूली कागजों मे अटकाई
एक तरफ आर्थिक तंगी और बदहाली का रोना रोया जा रहा हैं तो दूसरी तरफ बाड़मेर नगरपालिका करोड़ों की राजस्व वसूली कागजों मे अटकाए बैठी हैं। हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने 2005 मे आदेश जारी कर गलत ढंग से किए गये करीब 276 नियमनों के मामले मे बकाया 65 लाख से अधिक की वसूली की हिदायत दी थी लेकिन नगरपालिका ने एक प्रकरण मे भी आज तक वसूली नही की। इसी तरह बाड़मेर शहर मे अवैध रूप से बनी होटलों के मामले मे फाइलों मे 20 लाख और कुछ विचाराधीन होटल प्रकरणों मे जिनसे दो करोड़ से अधिक की वसूली बनती हैं वह भी नही की जा रही हैं। कईं मामलों मे तो अध्यक्षा खुद फाइलों पर कुण्डली मार की बैठी हुई हैं क्यों कि होटल मालिक चेयरमेन पति के कारोबारी दोस्त हैं।
आयुक्त के मकान के सामने नपा की 50 लाख की जमीन पर दुकानों का अवैध निर्माण
वर्तमान आयुक्त के मकान के ठीक सामने मठ के बाहर नगरपालिका के स्वामित्व की 50 लाख से अधिक की कीमत की जमीन पर दो महिने पहले जबरन दुकानों की कतार खड़ी करवा दी गर्ई। लेकिन आयुक्त आंखे मूंद कर बैठे रहे। मौहल्लेवासियों ने कलक्टर को शिकायत की तो आयुक्त ने जवाब दिया कि शिकायत बाद मे हुई हैं? अब तहसीलदार ही इसे हटा सकता हैं? जिला कलक्टर ने पिछले दिनों इस अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दे चुके हैं लेकिन आयुक्त ने हटाने के बजाय निर्माणकर्ताओं को दुकानों के बाहर खाली पड़ी नगरपालिका की जमीन पर नये सिरे से ओटों का निर्माण करवाने की छूट दे दी। इस जमीन पर दो साल पहले फिर माफियाओं ने निर्माण करवाने की कोशिश की थी लेकिन उस वक्त अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त करवा लिया गया था। इस तरह आयुक्त के मकान के ठीक सामने पालिका की 50 लाख कीमत की जमीन पर अवैध दुकानों का निर्माण हो गया, लेकिन वे जवाब देने के सिवाय कुछ नही कर पाये? आखिर क्यों? साफ हैं कि दाल मे काला हैं। दुकानों का अवैध निर्माण उनके घर मे सामने हो और उनके जवाब के मुताबिक हटाने की कार्यवाही तहसीलदार करे, आखिर ऐसा क्यों?
चोरी का आरोपी बाबू, अध्यक्ष का माध्यम
मौजूदा अध्यक्षा ने अपने पास ऑफिस की महत्वपूर्ण फाइलें तलब करने के लिए एक ऐसे कनिष्ठ लिपिक को माध्यम बना रखा हैं जिसके विरूद्व इसी नगरपालिका की महतवपूर्ण फाइलें एवं नक्शे चुराने, रिकॉर्ड मे हेराफेरी करने जैसे गंभीर आरोपों का मामला न्यायालय मे लम्बित हैं। वहीं पिछले 10 महिनों से वह बिना छुट्टी दिए पालिका से गायब रहा। ऐसे लिपिक को अपना माध्यम बना कर पालिका अध्यक्ष अपने खोटे एवं गलत कार्यो को अंजाम देने पर तुली हुई हैं। जो आयुक्त के अन्तिम आदेशों के बावजूद भी अपनी टिप्पणी कर अध्यक्षा को आदेश के लिए फाइल भेजने का काम कर रहा हैं। इस तरह महत्वपूर्ण फाइलें चोरी के आरोपी बाबू के माध्यम से आज भी पालिका मे बेखौफ निष्पादित की जा रही हैं। हो सकता हैं इस आरोपी बाबू की फाइल पर टिप्पणी या हस्ताक्षर ही कोई बड़ी रकम बतौर रिश्वत वसूलने का कोड वर्ड हो?
आर.ए.एस. की जगह भ्रष्ट राजस्व अधिकारी आयुक्त क्यों?
वर्तमान राज्य सरकार की नीति एवं आदेशों के तहत बाड़मेर नगरपालिका मे आर.ए.एस. अधिकारी को बतौर आयुक्त नियुक्त किया जाने का प्रावधान हैं। लेकिन बाड़मेर मे कुछ समय बाद ही उक्त भ्रष्ट राजस्व अधिकारी क ालूखां सलावट को आयुक्त पद पर तैनात क्यों किया गया? इस राजस्व अधिकारी को पिछले कार्यकाल मे बाड़मेर मे ही सस्पेंड कर भेजा जा चुका हैं। इसके विरूद्व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मे भी कईं मामलें लम्बित चल रहे हैं। कईं मामलों मे विभागीय जांचें भी लम्बित हैं तो ऐसे भ्रष्ट राजस्व अधिकारी को बाड़मेर मे आर.ए.एस. की जगह आयुक्त की तैनातगी आखिर क्यों की गई? क्या यह उचित और जायज हैं?
सूचना के अधिकार पर कुण्डली
एक तरफ आप स्वंय पारदर्शिता की नसीहत दे रहे हैं तो दूसरी तरफ यहां की नगरपालिका के आयुक्त एवं अध्यक्ष दोनों अपनी करतूतों को ढकने का दुसाहस कर रहे हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इनके पास एक नही सैकड़ों आवेदन और अपीलें लम्बित पड़ी हैं लेकिन ये कोई फैसला नही करते। किन्ही मामलों मे सूचना दी जाती हैं तो दूसरे प्रकरणों की, जिससे आवेदक को कोई सरोकार नही रहता। खुद राज्य सूचना आयोग भी इनकी हरकतों से तंग और हैरान हैं। यहां की अध्यक्षा ने आज दिन तक एक भी अपील का सूचना अधिनियम के तहत निस्तारण नही किया न सुनवाई की कोशिश की।
पनप रहा हैं अवैध कॉलोनियों का गौरख धंधा
पिछले दिनों बाड़मेर दौरे पर आये स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल ने पालिका अध्यक्ष एवं आयुक्त को स्पष्ट पाबंद किया था कि शहर के ईर्द गिर्द कोई भी अवैध कॉलोनी नही कटे लेकिन मंत्री के इस आदेश का भी इन पर कोई असर नही पड़ा। शहर मे दर्जनों कॉलोनियां बिना कनवर्जन धड़ल्ले से कट रही हैं। खुले मे विज्ञापन प्रचारित किए जा रहे हैं कि भूखण्ड खरीदने पर कनवर्जन करवा कर दिया जायेगा और ये ईनामी योजनाओं के झांसे मे ग्राहकों को फंसा रहे हैं। स्वंय पालिका अध्यक्षा के रिश्तेदार इन अवैध कॉलोनियों के कॉलोनाइाजर बने हुए हैं। आश्चर्य तो इस बात का हैं कि बाड़मेर नगरपालिका ने किसी भी निजी डवलपर्स और कॉलोनाइजर्स का पंजीकरण अपने यहां नही कर रखा हैं जिससे नगरपालिका को लाखों की राजस्व से हाथ धोना पड़ रहा हैं।
फोटो होटल- बाड़मेर: चेयरमेन पति द्वारा निर्मित बहुचर्चित ऋषभ रिसोर्ट एण्ड क्लब

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