बुधवार, 12 जनवरी 2011

वाह! गौरव वाह!

वाह! गौरव वाह!


महावीर जैन
सोमवार की रात ऑपरेशन 8 पीएम पर निकले बाड़मेर के युवा कलक्टर गौरव गोयल ने अवैध रूप से शराब बेचने वाले माफियाओं पर नकेल कसने के नाम पर जो कार्यवाही की, उसकी जितनी प्रशंसा और सराहना की जाये कम हैं। समाचार पत्रों मे मंगलवार की सुबह अवैध रूप से खुली दुकानों पर शराब की बोतलें देखते हुए जिला कलक्टर के छपे फोटो देख मासूम और स्कूली बच्चों से लगा कर गृहस्थ महिलाएं तक शाबासी दिए बिना नही रह सकी। इसी कलक्टर द्वारा नकली घी, झोला छाप डॉक्टरों व नकली मावा विक्रेताओं के खिलाफ की गई छापामार कार्यवाही की बातें अभी ठण्डी ही नही हुई कि सोमवार रात ठण्डी व सर्द हवाओं के बीच उन्होने ‘ऑपरेशन 8 पीएम’ की गर्मी फैला दी।


दरअसल, बात अवैध शराब माफियाओं पर शिकण्जा कसने के लिए की गई कार्यवाही की नही। पत्ते की बात तो यह हैं कि हमारे यहां पुलिस और आबकारी विभाग के अफसरों व कर्मचारियों की फौज तैनात हैं। सीआईडी जैसी खुफिया एजेन्सियां तैनात हैं। उनकी नजरों के सामने रात आठ बजे बाद सरेआम शराब के ठेके चलते हैं। होटल ढाबों व किराणे की दुकानों पर हरियाणा पंजाब जैसे स्टेटों से लाया गया अवैध शराब धड़ल्ले से बिक रहा हैं। खुद जिला कलक्टर ने मौके पर आये पुलिस इन्सपेक्टरों को यह दिखाया और कि यहां सब कुछ आपके रहते हुए क्या और क्यों हो रहा हैं?
बाड़मेर मे ज्यों ज्यों पैसा आया हैं और ज्यों ज्यों जमीनों के दाम बढे हैं त्यों त्यों अपराध के ग्राफ मे तेजी आई हैं। अपराध भी ऐसे घिनौने और संगीन प्रकृति के, जिसकी बाड़मेर मे पांच-सात साल पहले कोई कल्पना भी नही कर सकता था। पुलिस पर फायरिंग, मर्डर, अपहरण, हाथ पैर तोड़ कर जिन्दगी भर लाचार बना कर छोड़ देना- जैसे गंभीर अपराधों मे तेजी आई हैं। इक्कतीस दिसंबर की रात बाड़मेर के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम मे जोधपुर बाड़मेर के दर्जनों माफिया, शातिर अपराधी और वाण्टेड अभियुक्त सरलता से पहुंच गये। आधी रात तक मौज मस्ती लूटी। लेकिन हमारी पुलिस और खुफिया एजेन्सियां आंखों पर काली पट्टी बांधे बैठी रही। आधी रात बाद अपहरण और मर्डर हो गया लेकिन अपराधी पकड़ से बाहर। घायल हुआ मृतक का दूसरा साथी आज तक पुलिस के हत्थे नही चढा।
जिला कलक्टर गौरव गोयल ने संभवत: इन हालातों मे सोमवार की रात ‘ऑपरेशन 8 पीएम’ का श्रीगणेश अपने बूते पर किया। जिन लोगों पर हाथ डाला गया, वो नि:संदेह पहुंच वाले, रसूखदार और सत्ता तक दखल रखने वाले व्यक्ति हैं। गोयल की इस कार्यवाही को न केवल बेबाक, स्वतंत्र और निष्पक्ष ही नही बेहद प्रशंसनीय और सराहनीय माना व कहा जा सकता हैं। इससे छुटपुट माफियाओं मे स्वत: ही दहशत का माहौल तैयार हुआ हैं।
जिला कलक्टर के साथ साथ जिला पुलिस अधीक्षक भी नौजवान हैं। उन्हें इस बात का ध्यान होना चाहिए कि सीमावर्ती बाड़मेर अब अपराधियों की शरण स्थली बनता जा रहा हैं। जिनके घर दो-पांच साल पहले दो वक्त का चुल्हा नही जलता था, चढने को साईकिल नही थी, सुकुन करने लायक सोने की तीब उनके शरीर पर नही देखी जा सकती थी-आज ऐसे शख्स लग्जरी गाडिय़ों मे, शुटेड-बुटेड होकर बेखौफ घूम रहे हैं। इनके शरीर पर लाखों का कीमती सोना पहना हुआ देखा जा सकता हैं। इनकी हर रात रंगा-रंग गुजरती हैं। लेकिन दिखावे के लिए आज भी इनके पास कोई कारोबार नही हैं। ऐसे शख्सों की तादाद एक-दो-दस -बीस नही, सैकड़ों मे पहुंच गई हैं। ऐसे शख्सों को पुलिस थानों मे देखा जा सकता हैं तो पुलिस वालों को इनके यहां देखा जा सकता हैं। इनकी महफिलों मे शिरकत करते देखा जा सकता हैं। आखिर रातों-रात लाखों करोड़ों के मालिक बने इन तथाकथित लोगों ने खून पसीने की मेहनत से तो इतनी बड़ी रकम नही कमाई हैं?
दिनेश मांजू हत्याकाण्ड का राजफाश भले ही पुलिस बाद मे कभी कर पाये लेकिन एक बात तो साबित हो चुकी हैं कि मारवाड़ मे माफियाओं का पूरा एवं संगठित नेटवर्क सक्रिय हैं। सभी माफियाओं के तार मुम्बईया गिरोह की तरह जुड़े हुए हैं। आखिर ऐसे लोगों पर हमारी पुलिस और खुफिया एजेन्सियां गहन नजरें क्यों नही रखती? एजेन्सियां क्यों नही पूछती कि कल तक दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज रहने वाले आज चंद अंतराल बाद करोड़ों की दौलत के मालिक और विलासितापूर्वक जिन्दगी जीने वाले कैसे बन गये? दिनेश मांजू जैसा शातिर हिस्ट्रीशीटर बाड़मेर मे अपने सम्पर्को बिना किसी भी सूरत मे नही आ सकता था।
कलक्टर महोदय! यहां आप जैसे अधिकारियों की सख्त जरूरत हैं। यहां कुकरमुत्तों की तरह भूमाफिया पनप गये हैं। दुकान, प्लॉट व मकान खाली करवाने के ठेके लेने वाले गुण्डे पनप रहे हैं। सरकारी और विवादित जमीनें बेचने वाले गिरोहबद्व सक्रिय हैं। इन्हें हमारी ही नगरपालिका और पुलिस के भ्रष्ट कार्मिक व अधिकारी सरेआम पनाह दे रहे हैं। बाड़मेर मे हाईवे समेत कईं जगहों पर अवैध रूप से चल रही होटलों मे रात के अंधेरे मे क्या क्या नही होता? यहां रात व दिन को कैसे और कौन-कौन लोग ठहरते हैं इसकी न तो पुलिस जांच करती हैं न खुफिया एजेन्सियां। हाईवे मार्गो पर खुले होटलों मे रात के अंधेरे मे क्या गुल खिलते हैं कोई नही देखता? यहां सरेआम नकली सामान, खाद्यान्न सामग्री, खाद्य वस्तुएं, घी, तेल, दुध बिक रहा हैं। उपभोक्ताओं को छला जा रहा हैं। गरीब उपभोक्ताओं के मुंह का निवाला माने जाने वाला राशन का गेहूं आटा-फैक्ट्रियों मे सरेआम पिस रहा हैं। लोग बेखौफ रास्ते की जमीनों पर कब्जे कर अवैध निर्माण कर रहे हैं। ऐसी सैकड़ों करतूतें रसूखदार व पहुंच वाले लोग कर रहे हैं लेकिन उसे कोई रोक ने की हिम्मत नही जुटा रहा हैं।
लक्टर महोदय! बाड़मेर मे सत्ता तक पहुंच रखने वाले शख्स खुद माफियाओं से घिरे हुए हैं खुद अपनी तथाकथित ठेकेदारी-दुकानदारी चला रहे हैं। इस तरह के ‘ऑपरेशन क्लीन’ अभियान चलाने पर सियासत तक पहुंच रखने वाले लोग आपको अपने कदमों से विचलित करने की कोशिशें करनें मे कोई कसर नही छोड़ेंगे। लेकिन आम व साधारण जन मे शुमार होने वाले लाखों लोगों की दिल्ली दुआएं आपको सदैव सम्बल, समृद्वि एवं शक्ति प्रदान करती रहेगी, इसमें कोई शक-सन्देह नही। अंत मे मैं आपके उज्जवल भविष्य की कामना के साथ उम्मीद करता हूं कि आप वर्तमान की तरह सदैव निष्ठा, ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही व संविधान के प्रति ली गई कसम से कभी विचलित नही होंगे। आपकी राह मे आने वाले रसूखदार व पहुंच रखने वाले माफिया स्वत: ही परास्त होकर धराशायी होते रहेंगे।

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