रविवार, 16 जनवरी 2011

पालिका अध्यक्षा के फर्जी ‘हस्ताक्षरों’ पर हो सकता हैं बड़ा खेल!

पालिका अध्यक्षा के फर्जी ‘हस्ताक्षरों’ पर हो सकता हैं बड़ा खेल!

कभी टूटी फू टी हिन्दी मे तो कभी अंग्रेजी मे नोटशीटों पर आदेश देने वाली नगरपालिका अध्यक्षा के कथित हस्ताक्षरों को लेकर भी कभी बड़ा खेल हो सकता हैं! क्यों कि खबर मिली हैं कि उनके द्वारा फाइलों पर दिए जाने वाले आदेशों के दौरान किए जाने वाले दस्तखत अलग अलग किस्म के हैं? अब तक किए गये दस्तखतों की जांच करवाई जाये तो कईं और मामले उजागर हो सकते हैं।
 बाड़मेर, 15 जनवरी। विभिन्न विवादों को लेकर सुर्खियों मे रहने वाली नगरपालिका अध्यक्षा उषा जैन के फर्जी दस्तखतों से कभी भी बड़ा खेल हो सकता हैं। अंदर की खबर हैं कि उनके द्वारा फाइलों पर दिए जाने वाले आदेशों दौरान किए जाने वाले दस्तखत कईं बार अलग अलग होते हैं। यदि हैण्डराईटिंग एक्सपर्ट से इसकी जांच करवाई जाती हैं तो जालसाजी का बड़ा भण्डाफोड़ हो सकता हैं। नगरपालिका मे पूर्व अध्यक्ष के मामले मे भी फर्जी दस्तखत होने के मामले उजागर हो चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि नगरपालिका अध्यक्ष के ऑर्डर लेने के लिए अधिकतर फाईलें घर कॉल की जाती हैं। इन फाईलों पर कभी टूटी फूटी हिन्दी मे तो कभी अंग्रेजी मे आदेश जारी किए हुए होते हैं। ऐसे आदेशों के नीचे ‘चेयरमेन’ के दस्तखत भी अलग अलग किस्म के नजर आते हैं।
जानकार सूत्रों ने बताया कि ये अलग अलग किस्म के दस्तखत देखने से प्रथम दृष्ट््या माना जा सकता हैं कि चेयरमेन के दस्तखत दूसरे हाथों से हो रहे हैं। चूंकि चेयरमेन के पास बड़े एवं महत्वपूर्ण मामलों मे निर्णय के लिए फाईलें भेजी जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ नीचे स्तर के अधिकारी भी विभिन्न मामलों मे पहले से ही विवादित चल रहे हैं। ऐसे मे बड़े मामलों मे खोटा, नियम विरूद्व एवं गलत आदेश कभी भी पारित हो सकता हैं जिसका खामियाजा नगरपालिका और आमजन को भी भुगतना पड़ सकता हैं।
सूत्रों ने बताया कि पहले से ही इस नगरपालिका मे तीन अध्यक्ष होने का जुमला प्रचलित हैं। जिसमें एक चेयरमेन तो खुद उषा देवी तथा दो चेयरमेन ‘सी.पी.’ के नाम से पहचानते जाते हैं। सी.पी. का मतलब चेयरमेन पति और चेयरमेन पुत्र से हैं। क्यों कि दोनों सी.पी. की हेण्डराईटिंग से पालिका की फाईलों पर कईं आदेश लिखे जा चुके हैं। पालिका सूत्रों के मुताबिक ऐसी फाईलों की संख्या भी बड़ी तादाद मे हैं।


अब तो आरोपित लिपिक लिखवाता हैं आदेश
चेयरमेन द्वारा इन दिनों फाईलों पर दिए जाने वाले आदेश लिखवाने का काम एक आरोपित लिपिक द्वारा ही करवाया जा रहा हैं। जो खुद हेराफेरी, जालसाजी, धोखाधड़ी एवं पालिका कार्यो मे घोर उदासीनता बरते जाने जैसे मामलों मे लिप्त रहा हैं। इस लिपिक की तैनातगी के लिए पालिका अध्यक्षा ने प्रदेश के स्वायत शासन मंत्री और डायरेक्टर तक पर जोरदार दबाव बनाया और इसका यहां पदस्थान करवाने का मुद््दा अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था। नगरपालिका की विभिन्न शाखाओं के प्रभारियों व आयुक्त के बाद इस लिपिक की टिप्पणी अंकित करवाये बिना महत्वपूर्ण मामलों मे कोई निर्णय नही लिया जा रहा हैं। ऐसे मे अंदाज लगाया जा सकता हैं कि एक दागदार कर्मचारी की टिप्पणियों पर चेयरमेन के आदेश निर्भर रहते हैं तो उनके आदेशों की वैद्यानिकता एवं व्यवहारिकता किस स्तर की होगी?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें