शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

कहीं जमींदोज न हो जाएं बहुमंजिला होटलें!

बाड़मेर शहर भूकंप जोन 4 मे शामिल हैं। यहां बनने वाली बहुमंजिला इमारतें व होटलों का भूकम्परोधी निर्माण अनिवार्य हैं लेकिन बाड़मेर शहर के महावीर नगर, नेहरू नगर और स्टेशनरोड़ इलाके मे बनी आधा दर्जन से अधिक होटलों का निर्माण न तो भूकम्परोधी हैं न वह सुरक्षा के लिए उपर्युक्त हैं। ऐसे मे इन बहुमंजिला होटलों पर जमींदोज हो जाने का खतरा बना हुआ हैं।

नगरपालिका ने तो इन कथित होटलों के निर्माण की अनुमति तक नही दी हैं केवल दुकानों व मकान निर्माण की इजाजतें कागजों मे स्वीकृत की हैं लेकिन उनकी मिली भगती से गलत इजाजतों पर होटलें खड़ी हो गई। हालांकि नगरपालिका ने इजाजत शर्त मे भूकम्परोधी निर्माण की शर्त लिख अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली हैं लेकिन भूकम्परोधी निर्माण का कोई प्रमाण पत्र इन बिल्डिंग मालिकों से नही लिया गया हैं।

मकान- दुकान के निर्माण की अनुमति, खड़ी कर दी होटलें

विशेष सवांददाता

बाड़मेर। यहां मिले तेल एवं खनिज भण्डारों के मध्यनजर बड़ी संख्या मे देशी विदेशी लोगों की आवाजाही शुरू हुई। परिणामस्वरूप बाड़मेर मे बाहरी ट्रेफिक का दबाव बढने लगा। ऐसे मे यहां के लोगों ने मुख्य मार्गो पर अंधाधुन होटलें बनानी शुरू कर दी। नगरपालिका नियमों के तहत होटल बिल्डिंग की अनुमति देने से पहले बिल्डिंग का क्षैत्रफल, उसी हिसाब से सेटबेक छोडऩे, पार्किंग सुविधाएं सुनिश्चित करने और निर्मित एरिया एफ.ए.आर. के मुताबिक स्वीकृत करने की कार्यवाही की जाती हैं।

इन तमाम कानूनी प्रावधानों पर अमल किया जाये तो उपलब्ध भूखण्ड क्षैत्रफल के 40 से 50 फीसदी भूभाग पर ही होटल बिल्डिंग का निर्माण बमुश्कील संभव हो सकता हैं। ऐसे मे इन लोगों ने नगरपालिका अफसरों की मिली भगती से अपने भूखण्डों पर मकान-दुकान निर्माण की स्वीकृतियां लेकर अवैध रूप से होटलें खड़ी कर दी। बाड़मेर शहर के हाईस्कूल रोड़, स्टेशन रोड़, नेहरू नगर और महावीर नगर मे इन होटलों की तादाद आधा दर्जन से पार हैं।
अवैध निर्माण से क्या हो रहा हैं नुकसान
इन अवैध बहुमंजिला होटलों के निर्माण से नगरपालिका कोष को लाखों-करोड़ों की राजस्व का नुकसान हुआ हैं। वहीं ऐसे बहुमंजिला होटल आम ट्रेफिक व्यवस्था को बाधित करने के साथ साथ आमजन की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। नगरपालिका के अधिशाषी अभियंता तनेराम मेघवाल ने तो स्टेशन रोड़ पर ऐसे ही अवैध रूप से निर्मित कृष्णा व्हाईट हाऊस इंटरनेशनल होटल के बारे मे दी अपनी मौका निरीक्षण रिपोर्ट मे स्पष्ट लिखा हैं कि यह बहुमंजिला भवन न तो व्यवसायिक माना जा सकता न होटल। इस भवन मे होटल संचालन करना खतरनाक हैं। 
करोड़ों की वसूली पर कुण्डली
नगरपालिका ने नेहरू नगर की गोपाल होटल और स्टेशन रोड़ की कृष्णा व्हाईट हाऊस इंटरनेशनल होटल के अवैध निर्माण के मामले मे तो लाखों की वसूली प्रस्तावित कर रखी हैं लेकिन यह वसूली कागजों मे ही सिमट कर रह गई हैं। कमोबेश, ऐसे ही हालात नेशनल हाईवे पर बनी होटल कैलाश इंटरनेशनल के हैं। पिछली बार इंटरनेशनल होटल पर बुलडोजर चला कर करीब 62 लाख की नियमन राशि बतौर जुर्माना वसूल की थी लेकिन मौके पर अब उससे चार गुना ज्यादा निर्माण हो रखा हैं यदि कायदे से पूर्ववत वसूली निकाली जाये तो यह रकम करोड़ों मे पहुंचती हैं। लेकिन नगरपालिका अफसर इन तमाम फाईलों पर कुण्डली मार कर बैठे हैं। जाहिर हैं उनकी नीयत मे कहीं न कहीं खोट हैं।
न पार्किंग, न सेटबेक न भवन सुरक्षा
स्टेशन रोड़, हाईस्कूल रोड़ व महावीर नगर तथा नेहरू नगर मे बनी इन बहुमंजिला अवैध होटलों मे न तो निर्धारित सेट बेक छोड़ा हुआ हैं न पार्किंग सुविधा। ऐसी बिल्डिंगों मे व्यवसायिक गतिविधियां शुरू करने से पूर्व सक्षम इंजीनियर व आर्किंटेक्ट का प्रमाण पत्र लेकर नगरपालिका मे जमा करवाना होता हैं लेकिन बाड़मेर मे ऐसा कुछ नही हो रहा हैं। जोखिमभरी सभी बिल्डिंगों मे अवैध होटलें संचालित हो रही हैं। स्टेशन रोड़ पर बिना पार्किंग होटलें चलने से आम यातायात गड़बड़ाया हुआ हैं जिसके कारण आये दिन दुर्घटनाएं भी होरही हैं।
इजाजत 2 मंजिल की, बना दी 6 मंजिलें
स्टेशन रोड़ पर चैकपोस्ट के सामने बनी होटल मरूधरा पैलेस के निर्माण के लिए नगरपालिका से जो इजाजत ली गई हैं वह 2 मंजिला निर्माण की हैं। अनुमोदित मानचित्र मे बेसमेट को पार्किंग दर्शाया हैं ग्राऊंड फ्लोर पर दुकानें व प्रथम फ्लोर पर कमरे बनाने दिखाये गये हैं। लेकिन मौके पर यह बिल्डिंग 6 मालों पर खड़ी करवाई हुई हैं। चौकान्ने वाली बात तो यह हैं कि इस शख्स को नगरपालिका ने आवासीय उदेश्य के लिए 40 साल पुराना कब्जा मानते हुए स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत आवासीय पट्टा दिया था लेकिन नियम विरूद्व इसे कॉमर्शियल निर्माण की अनुमति इस पट्टे पर दे दी।
कलक्टर के आदेश भी ताक पर
जिला कलक्टर गौरव गोयल ने नगरपालिका अफसरों को हर बैठक मे यह निर्देश दिए कि वह होटलों व बहुमंजिला कॉम्पलेक्सों मे पार्किंग सुविधा बहाल करावें लेकिन नगरपालिका अफसर आज तक इन निर्देशों को ताक मे रखे हुए हैं। स्टेशन रोड़ चैक पोस्ट के सामने तो एक होटल भवन के अनुमोदित नक् शे मे बेसमेट पूरा पार्किंग के लिए आरक्षित बताया हुआ हैं लेकिन मौके पर पार्किंग की जमीन पर दुकानों का निर्माण करवाया हुआ हैं।
इसी तरह दिखावे के लिए पालिका ने ऐसी होटलों के मालिकों को पार्किंग के नोटिस भी दिए लेकिन किसी के खिलाफ नोटिस की अवहेलना पर सख्त कार्यवाही नही की।
परिणामस्वरूप, यह हो रहा हैं कि हाईस्कूल रोड़ एवं महावीर नगर मे निर्माणाधीन होटलों मे भी पार्किंग, सेटबेक एवं एफएआर नही छोड़ा जा रहा हैं।
क्या हैं नगरपालिका को पॉवर
नगरपालिका नियमों के तहत स्वीकृत इजाजत एवं अनुमोदित मानचित्र के विरूद्व होने वाले किसी निर्माण को नगरपालिका जनहित मे धराशायी कर सकती हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने तो महेन्द्र लोढा वर्सेज सरकार के जनहित के मामले मे बिना पार्किंग चलने वाली बहुमंजिला इमारतों मे तो पार्किंग सुविधा बहाल न होने तक उन्हें सील करने के आदेश दे रखे हैं।
बावजूद इसके बाड़मेर नगरपालिका प्रशासन ऐसे गंभीर व जनता की सुरक्षा से जुड़े मामलों मे मूकदर्शक एवं खामोश बने हुए हैं। हालांकि इस बार जिला जन अभाव अभियोग एवं सतर्कता समिति की बैठक मे भी बिना पार्किंग होटलें संचालित होने के मामले मे सुनवाई होने वाली हैं। बहरहॉल, शहर की ट्रेफिक व्यवस्था के लिए नासूर बनी हुई इन अवैध होटलों पर असरदार कार्यवाही की जरूरत हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें