शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

विवादों के दल-दल मे फंसती जा रही हैं नगरपालिका अध्यक्षा!

कभी भी लाया जा सकता हैं अविश्वास प्रस्ताव, 16 समर्थक पार्षद खिसके
विवादों के दल-दल मे फंसती जा रही हैं नगरपालिका अध्यक्षा!
बाड़मेर, 13 जनवरी। शुरूआती दौर मे ही राजनीतिक खिंचातान की शिकार रही नगरपालिका अध्यक्षा दिन-ब-दिन विवादों के दल दल मे फंसती नजर आ रही हैं। अंदर की खबर हैं यही हालात रहे तो उनके विरूद्व थोड़े ही दिनों मे सुनियोजित ढंग से अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता हैं। वैसे एक दिन पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट निकाय अध्यक्षों के विरूद्व अविश्वास प्रस्ताव नही ला सकने के सरकारी आदेश को स्थगित कर चुकी हैं। ऐसे मे बाड़मेर नगरपालिका अध्यक्षा के विरूद्व जल्द ही कोई अविश्वास प्रस्ताव सदन मे आ जाये तो कोई आश्चर्य की बात नही होगी।
सूत्रों ने बताया कि नगरपालिका बोर्ड मे कांग्रेस के 22 निर्वाचित एवं 3 कांग्रेस समर्थित निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा के 15 पार्षद चुने हुए हैं। गुरूवार को कांग्रेस की अध्यक्षा के विरूद्व प्रोसेडिंग रद््द करने के मामले मे राज्य सरकार को जो ज्ञापन भेजा हैं उनमें 31 पार्षद शामिल हैं उनमें 15 बीजेपी के हैं तथा 16 कांग्रेस व कांग्रेस समर्थित निर्दलीय पार्षद हैं। ऐसे मे दो तिहाई से अधिक पार्षदों के साथ तो पालिका अध्यक्षा का खुला टकराव सामने आ चुका हैं। वैसे अध्यक्षा की लॉबी मे कांग्रेस के गिने चुने पार्षद भी नही हैं। खुद कांग्रेस मे वह राजनीतिक अस्तित्व की जंग लड़ कर अलग थलग हो चुकी हैं।
पट्टे जारी करने मे हैं अनियमितताओं के आरोप




वर्तमान पालिका अध्यक्षा पर पट्टे जारी करने मे सबसे बड़ी अनियमितताएं बरतने के आरोप लगे हुए हैं। आश्चर्य तो यह हैं कि अध्यक्षा ने एक ही ब्लॉक की जमीनों के दो अलग अलग खसरा नंबर अंकित कर दर्जनों पट्टे जारी कर दिए हैं। दरअसल, ये खसरे कच्ची बस्तियों से जुड़े हुए हैं जहां सर्वे सूची मे दर्ज नही होने वाले कब्जेधारियों को पट्टे देने पर मनाही हैं तथा दूसरे कब्जेधारी पालिका के अतिकर्मी माने जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि इस तरह करोड़ों की पालिका की जमीन के कच्ची बस्तियों मे कृषि भूमि दिखा कर पट्टे जारी करवा दिए। हालांकि इस मामले मे जिला कलक्टर गौरव गोयल ने गुड़ामालानी उपखण्ड अधिकारी सी.एल. देवासी को जांच अधिकारी मुर्कर कर समूची जांच का जिम्मा दिया हैं।
आरोपित लिपिक के इशारों पर कामकाज की निंदा
पालिका अध्यक्षा पहले अपने यहां बेनामी पी.ए. लगा कर विवादों मे लिप्त रही हैं। लेकिन अब तो उसने एक ऐसे आरोपित लिपिक के इशारों पर पालिका प्रशासन चलाने की कवायद शुरू कर रखी हैं जो खुद हेराफेरी, अनियमितताओं व लापरवाही जैसे गंभीर मामलों मे कईं बार निलम्बित हो चुका हैं। लिपिक के विरूद्व फौजदारी मामले आज भी लम्बित हैं। ऐसे मे सवाल उठ रहा हैं कि ईमानदार बताने वाली पालिका अध्यक्षा ने ऐसे आरोपित व दागदार लिपिक को आखिर सर्वेसर्वा क्यों बनाया? अध्यक्षा की इस कार्यशैली से नगरपालिका मे तमाम कामकाज ठप्प पड़ा हैं। अधिकारी एवं वरिष्ठ कर्मचारी इस अदने से कर्मचारी के जरिए फाईल भेजने मे अपनी तौहीन समझ रहे हैं।
दर्ज हो सकते हैं मुकदमे
पालिका अध्यक्षा द्वारा अपने कार्यकाल मे दिए गये नियम विरूद्व एवं गलत पट्टों के मामले मे कईं जनों ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचनाएं मांग रखी हैं लेकिन पालिका प्रशासन ऐसी सूचनाएं देने के लिए टरकाऊ रवैया अपना रहा हैं। सूत्रों ने बताया कि अध्यक्षा ने अपने दस्तखतों से सैकड़ों की संख्या मे ऐसे गलत पट्टे अब तक जारी कर दिए हैं। ऐसे मे जब भी सूचनाएं सार्वजनिक हुई, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो समेत दूसरी एजेन्सियों मे कईं मामलें दर्ज हो सकते हैं।

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