आखिर भगवान को ही बनाना पड़ेगा बाड़मेर का लोकपाल!
न अफसरों मे जमीर, न माफियाओं को डर
कार्यालय संवाददाता
बाड़मेर। भूमाफिया, मिलावटखोर, भ्रष्ट,गबनखोर और अन्याय तथा अत्याचार करने वालों ने तो अपनी करतूतों से आमजन को असहाय और असमर्थ बना कर रख दिया है। इस माहौल मे लगता हैं यहां न तो अफसरों मे जमीर बचा हैं न माफियाओं मे कानून का डर। एक ही थाली मे खाना खा रहे हैं माफिया और अफसर। जनप्रतिनिधियों की बात ही अलग है। जो अपनी अलग ही दुनिया चला रहे है। आम आदमी त्रस्त, हैरान और परेशान ही नही अपने आपको अकेला, लुटा हुआ और शोषित समझ कर खामोश है। आखिर वो दुखड़ा सुनाये तो किसे और सुने भी कौन। बाड़मेर की ऐसी दुर्दशा हो जायेगी, शायद किसी ने सपने मे भी नही सोचा होगा। आसमां छूते जमीनों के दामों ने शरारती तत्वों से लगा कर जनप्रतिनिधि बन बैठे नेताओं और मलाईदार कुर्सियों पर काबिज अफसरों को मालामाल कर छोड़ दिया। जिसके हाथ जहां जिसकी जमीन लगी, वह कब्जे कर बैठ गया। जमीन चाहे किसी गरीब की थी, या सरकार और पालिका की। इन लोगों ने दबंगई दिखा कर जमीनों के पट्टे बना लिये और फिर मुंहमांगे दामों मे बेच दिया। उप पंजीयक बने अधिकारियों ने तो सरकारी जमीन के बेचान पंजीबद्व करने के रिकॉर्ड कायम कर लिये। वे भी इसी अंधी दौड़ मे ठूंस ठूंस कर पैसे वसूलने मे पीछे नही रहे। यह खुला खेल आज भी बदस्तूर चल रहा है। कहीं कॉलोनियों पर कार्यवाही के नाम पर गडबड़ हो रही हैं तो कहीं कॉलोनियों को छूट देने के नाम पर कमाई। अपने सपनों का एक आशियाना ढूंढने की फिराक मे लगे आम व्यक्ति को हर कोई ठग रहा हैं वह भी मस्ती से।
यही हालात बाजार के है। नकली घी की फैक्ट्री बेखौफ चला रहा हैं एक माफिया। जेल यात्रा कर चुके इस माफिया ने नकली घी बेचने के नाम पर पूजा ऑयल की आड़ ली है। रसद विभाग का इंसपेक्टर ठगी का शिकार हुआ, पुलिस कोतवाली मे रिपोर्ट दर्ज करवाई लेकिन माफिया के बाल भी बांका नही हुआ। रोजाना सैकड़ों लोगों को ठग रहा हैं हजारों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। प्रशासन, पुलिस, रसद एवं स्वास्थ्य विभाग के अफसर तालियां बजा रहे है। मुख्यमंत्री जी के शुद्व के लिए युद्व अभियान के साथ यहां सरेआम बलात्कार हो रहा है। बाकी के नकली धंधों की तो बात छोड़ो। जिला मुख्यालय पर आला अफसरों की नाक के नीचे एक माफिया कानून को चैलेंज देकर रोजाना लाखों छाप रहा है।
यहां सरकारी खजाने की रकम रसीद देकर खुद की जेब मे डाल मस्ती से बैठने वालों को पुलिस ईमानदार बता रही हैं शिकायत करने वालों को चोर। महिनों पहले पकड़े गये एक नंबर को दो टेम्पो थाने मे पड़े है। आरोपी मस्ती से घूम रहे है। घर के बाहर खड़ी मोटरसाईकिल चोरी होती हैं रिपोर्ट करने थाने पहुंचने वालों को मुल्जिम की तरह घंटो बिठाये रखने के बाद नसीहत दी जाती हैं कि घर के अंदर बाईक रखने की जगह नही हो तो ऐसे सूख पालना छोड़ दो। चोरी की एफआईआर लिखवाने मे फरियादी को पसीना बहाना पड़ रहा है।
शहर मे एक गरीब बिना इजाजत झौंपड़ी बना लें तो उस पर बुलडोजर घूमा दिया जाता है। एक दिहाड़ी मजदूर फूटपाथ पर सामान रख कर दो वक्त का चुल्हा जला कर बीवी बच्चों की भूख शांत करने का गुनाह करता हैं तो उसे अतिक्रमी मान बेइज्जत कर खदेड़ दिया जाता हैं लेकिन एक अमीर बहुमंजिला अवैध निर्माण करवा ले तो उसके तलवे चाटने मे लग जाते हैं अफसर, क्यों कि उनसे मुंहमांगी रकम बतौर रिश्वत मिलती हैं उन्हें। यहां के कलक्टर डेढ साल से पालिका आयुक्त को ऑर्डर दे रहे हैं कि शहर मे इजाजत के विरूद्व कोई निर्माण नही होना चाहिए। बड़े कॉमर्शियल निर्माण मे पार्किंग होनी चाहिए। सेट बैैक छोड़ें वरना बिल्डिंग नही बनने दें। लेकिन पालिका आयुक्त कलक्टर के इस ऑर्डर पर अपनी जेब गर्म कर रहे है।
भ्रष्टाचार एवं अन्याय के विरूद्व आवाज उठाने का साहस करने वालों को ब्लेकमेलर, भ्रष्ट एवं बेईमान साबित करने मे पूरा महकमे ही नही राजनेता भी खप जाते हैं और पूरी शक्ति -ताकत के साथ। उन्हें पता हैं कि यह आवाज उनके विरूद्व भी कल खड़ी हो सकती हैं इसलिए आज ही इस आवाज को क्यों न कुचल दिया जाये। उनकी सोच के मुताबिक न रहेगा बांस, न बजेगी बांसूरी।
कल तक यानि दो-पांच साल पहले तक किराये की साईकिल पर सफर करने लायक जेब मे पैसे ढूंढने वाले आज लग्जरी कारों मे मस्ती से घूमते नजर आ रहे है। करोड़ों के भूखण्ड उनके नाम है। यह रातोंरात धन बारिश ईश्वरीय चमत्कार से नही हुई है। यह बेईमानी, बदमाशी और आंतक से लाई गई बारिश है। सैकड़ों, हजारों गरीबों से लुटी हुई सम्पति पर ये लोग ऐश कर रहे है। हमारे जन प्रतिनिधियों के ईर्द गिर्द ऐसे ऐशबाजों का जमघट नजर आता है। आला अफसरों तक इनकी घूसपेठ है। ऐसे मे बेचारा और असहाय चेहरा आखिर अपनी फरियाद किसको सुनाये। बहरहॉल, जो कुछ बाड़मेर मे इन दिनों हो रहा हैं उन हालातों मे तो कोई अधिकारिक लोकपाल भी अपनी असमर्थता जताये बिना नही रह सकेगा। आखिर भगवान को ही लोकपाल के अवतार मे यहां उतरना होगा।
न अफसरों मे जमीर, न माफियाओं को डर
कार्यालय संवाददाता
बाड़मेर। भूमाफिया, मिलावटखोर, भ्रष्ट,गबनखोर और अन्याय तथा अत्याचार करने वालों ने तो अपनी करतूतों से आमजन को असहाय और असमर्थ बना कर रख दिया है। इस माहौल मे लगता हैं यहां न तो अफसरों मे जमीर बचा हैं न माफियाओं मे कानून का डर। एक ही थाली मे खाना खा रहे हैं माफिया और अफसर। जनप्रतिनिधियों की बात ही अलग है। जो अपनी अलग ही दुनिया चला रहे है। आम आदमी त्रस्त, हैरान और परेशान ही नही अपने आपको अकेला, लुटा हुआ और शोषित समझ कर खामोश है। आखिर वो दुखड़ा सुनाये तो किसे और सुने भी कौन। बाड़मेर की ऐसी दुर्दशा हो जायेगी, शायद किसी ने सपने मे भी नही सोचा होगा। आसमां छूते जमीनों के दामों ने शरारती तत्वों से लगा कर जनप्रतिनिधि बन बैठे नेताओं और मलाईदार कुर्सियों पर काबिज अफसरों को मालामाल कर छोड़ दिया। जिसके हाथ जहां जिसकी जमीन लगी, वह कब्जे कर बैठ गया। जमीन चाहे किसी गरीब की थी, या सरकार और पालिका की। इन लोगों ने दबंगई दिखा कर जमीनों के पट्टे बना लिये और फिर मुंहमांगे दामों मे बेच दिया। उप पंजीयक बने अधिकारियों ने तो सरकारी जमीन के बेचान पंजीबद्व करने के रिकॉर्ड कायम कर लिये। वे भी इसी अंधी दौड़ मे ठूंस ठूंस कर पैसे वसूलने मे पीछे नही रहे। यह खुला खेल आज भी बदस्तूर चल रहा है। कहीं कॉलोनियों पर कार्यवाही के नाम पर गडबड़ हो रही हैं तो कहीं कॉलोनियों को छूट देने के नाम पर कमाई। अपने सपनों का एक आशियाना ढूंढने की फिराक मे लगे आम व्यक्ति को हर कोई ठग रहा हैं वह भी मस्ती से।
यही हालात बाजार के है। नकली घी की फैक्ट्री बेखौफ चला रहा हैं एक माफिया। जेल यात्रा कर चुके इस माफिया ने नकली घी बेचने के नाम पर पूजा ऑयल की आड़ ली है। रसद विभाग का इंसपेक्टर ठगी का शिकार हुआ, पुलिस कोतवाली मे रिपोर्ट दर्ज करवाई लेकिन माफिया के बाल भी बांका नही हुआ। रोजाना सैकड़ों लोगों को ठग रहा हैं हजारों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। प्रशासन, पुलिस, रसद एवं स्वास्थ्य विभाग के अफसर तालियां बजा रहे है। मुख्यमंत्री जी के शुद्व के लिए युद्व अभियान के साथ यहां सरेआम बलात्कार हो रहा है। बाकी के नकली धंधों की तो बात छोड़ो। जिला मुख्यालय पर आला अफसरों की नाक के नीचे एक माफिया कानून को चैलेंज देकर रोजाना लाखों छाप रहा है।
यहां सरकारी खजाने की रकम रसीद देकर खुद की जेब मे डाल मस्ती से बैठने वालों को पुलिस ईमानदार बता रही हैं शिकायत करने वालों को चोर। महिनों पहले पकड़े गये एक नंबर को दो टेम्पो थाने मे पड़े है। आरोपी मस्ती से घूम रहे है। घर के बाहर खड़ी मोटरसाईकिल चोरी होती हैं रिपोर्ट करने थाने पहुंचने वालों को मुल्जिम की तरह घंटो बिठाये रखने के बाद नसीहत दी जाती हैं कि घर के अंदर बाईक रखने की जगह नही हो तो ऐसे सूख पालना छोड़ दो। चोरी की एफआईआर लिखवाने मे फरियादी को पसीना बहाना पड़ रहा है।
शहर मे एक गरीब बिना इजाजत झौंपड़ी बना लें तो उस पर बुलडोजर घूमा दिया जाता है। एक दिहाड़ी मजदूर फूटपाथ पर सामान रख कर दो वक्त का चुल्हा जला कर बीवी बच्चों की भूख शांत करने का गुनाह करता हैं तो उसे अतिक्रमी मान बेइज्जत कर खदेड़ दिया जाता हैं लेकिन एक अमीर बहुमंजिला अवैध निर्माण करवा ले तो उसके तलवे चाटने मे लग जाते हैं अफसर, क्यों कि उनसे मुंहमांगी रकम बतौर रिश्वत मिलती हैं उन्हें। यहां के कलक्टर डेढ साल से पालिका आयुक्त को ऑर्डर दे रहे हैं कि शहर मे इजाजत के विरूद्व कोई निर्माण नही होना चाहिए। बड़े कॉमर्शियल निर्माण मे पार्किंग होनी चाहिए। सेट बैैक छोड़ें वरना बिल्डिंग नही बनने दें। लेकिन पालिका आयुक्त कलक्टर के इस ऑर्डर पर अपनी जेब गर्म कर रहे है।
भ्रष्टाचार एवं अन्याय के विरूद्व आवाज उठाने का साहस करने वालों को ब्लेकमेलर, भ्रष्ट एवं बेईमान साबित करने मे पूरा महकमे ही नही राजनेता भी खप जाते हैं और पूरी शक्ति -ताकत के साथ। उन्हें पता हैं कि यह आवाज उनके विरूद्व भी कल खड़ी हो सकती हैं इसलिए आज ही इस आवाज को क्यों न कुचल दिया जाये। उनकी सोच के मुताबिक न रहेगा बांस, न बजेगी बांसूरी।
कल तक यानि दो-पांच साल पहले तक किराये की साईकिल पर सफर करने लायक जेब मे पैसे ढूंढने वाले आज लग्जरी कारों मे मस्ती से घूमते नजर आ रहे है। करोड़ों के भूखण्ड उनके नाम है। यह रातोंरात धन बारिश ईश्वरीय चमत्कार से नही हुई है। यह बेईमानी, बदमाशी और आंतक से लाई गई बारिश है। सैकड़ों, हजारों गरीबों से लुटी हुई सम्पति पर ये लोग ऐश कर रहे है। हमारे जन प्रतिनिधियों के ईर्द गिर्द ऐसे ऐशबाजों का जमघट नजर आता है। आला अफसरों तक इनकी घूसपेठ है। ऐसे मे बेचारा और असहाय चेहरा आखिर अपनी फरियाद किसको सुनाये। बहरहॉल, जो कुछ बाड़मेर मे इन दिनों हो रहा हैं उन हालातों मे तो कोई अधिकारिक लोकपाल भी अपनी असमर्थता जताये बिना नही रह सकेगा। आखिर भगवान को ही लोकपाल के अवतार मे यहां उतरना होगा।
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