रविवार, 7 अगस्त 2011

नगरपालिका कर्मचारियों के मध्य बेशकीमती भूखण्डों की बंदरबांट का मामला

नगरपालिका कर्मचारियों के मध्य बेशकीमती भूखण्डों की बंदरबांट का मामला
प्रशासन भेजेगा डीएलबी को प्रकरण
बाड़मेर, 7 अगस्त। नगरपालिका कर्मचारियों के मध्य बेशकीमती भूखण्डों की रियायती दरों पर की गई बंदरबांट के मामले मे विजिलेंस सेल ने कार्यवाही से हाथ झिडक़ दिये है। खबर हैं कि करीब दो साल तक विजिलेंस सेल इस मामले को लेकर बैठी रही और अब डीएलबी निदेशक को यह प्रकरण रेफर करने का निर्णय लिया गया है। उल्लेखनिय रहे कि नगरपालिका के कतिपय कर्मचारियों व अधिकारियों ने तमाम नियम कायदे ताक मे रखते हुए 20 से 25 लाख की कीमत के महावीर नगर के भूखण्डों का आवंटन अपने नाम करवा लिया था। कर्मचारियों ने इस आवंटन के लिए शपथ पत्र तक झूठे पेश किए कि उनके नाम से कोई भूखण्ड कहीं भी नही है। सूत्रों ने बताया कि एक पूर्व पार्षद ने करोड़ों की पालिका को चपत लगाने के इस मामले मे नियम विरूद्व हुए आवंटन को लेकर जिला कलक्टर की अध्यक्षता वाली विजिलेंस सेल को शिकायत की। करीब दो साल से चल रहे इस मामले मे 6 महिने पहले जांच अधिकारी अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चुनाराम विश्नोई ने रिपोर्ट दी कि पालिका के     अधिकारियों ने उन्हें जांच के लिए फाइलें तक नही दी और जो फाइलें दी उसमें शपथ पत्र तक गायब कर लिये। जांच अधिकारी की इस रिपोर्ट पर विजिलेंस सेल ने कोई कार्यवाही करने के बजाय दो साल से लम्बित चल रहे इस प्रकरण को अब डीएलबी के निदेशक के पास भेजने का फैसला किया है।
रिजर्व प्राइस पर हुआ था आवंटन
सूत्रों ने बताया कि महावीर नगर मे नियम विरूद्व भूखण्डों का आवंटन इन कर्मचारियों को रिजर्व प्राइस पर किया गया था। बाजार मे प्रत्येक भूखण्ड की कीमत 20 से 25 लाख रूपये है। कायदे से उन कर्मचारियों को भूखण्डों का आवंटन किया जा सकता हैं जिनके पास रहवास के लिए उनके नाम से कहीं भी प्रदेश भर मे भूखण्ड नही हो। लेकिन बाड़मेर मे जिन कार्मिकों को आवंटन किए गये हैं उनके नाम से पहले से ही भूख्ंाड व मकान हैं तथा कुछ ने तो नगरपालिका से पहले पट्टे ले रखे है। आश्चर्य तो इस बात का हैं कि कुछ ऐसे कर्मचारी भी इसमें मालामाल हो गये हैं जिन्होने पहले से ही लॉटरी सिस्टम से महावीर नगर स्कीम मे भूखण्ड ले रखे है।
शपथ पत्र भी गोलमाल
ऐसे भूखण्डों के आवंटन के लिए कर्मचारी को शपथ पत्र देना होता हैं कि उनके नाम से कहीं भी भूखण्ड या रहवासी मकान नही है। लेकिन इस आवंटन मे कर्मचारियों ने शपथ पत्र की भाषा ही बदल दी और बाद मे जांच दौरान ये शपथ पत्र भी फाइलों से गायब कर लिये।
और बेच दिये भूखण्ड
सूत्रों ने बताया कि डेढ लाख की कीमत मे भूखण्ड आवंटन के बाद इन कर्मचारियों ने तत्काल ही इन भूखण्डों का मुनाफा ठोक कर बेचान कर लिया। नियमानुसार इन भूखण्डों का बेचान नही किया जा सकता।
आज भी खाली पड़े हैं भूखण्ड
सूत्रों ने बताया कि महावीर नगर योजना मे आवंटित भूखण्डों पर दो साल के भीतर भीतर मकान निर्माण करवाना अनिवार्य हैं अन्यथा नगरीय भूमि निष्पादन अधिनियम के तहत खाली पड़े भूखण्डों का आवंटन स्वत: ही निरस्त हो जाता हैं लेकिन इनमें से कईं कार्मिकों के भूखण्ड आज भी खाली पड़े है। जो कायदे से नगरपालिका की सम्पति माने जा सकते है।

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