कलक्टर रोज आदेश देते हैं लेकिन नही रूक रहा हैं मौतों का सिलसिला!
आवारा सांड ने ली 2 महिने मे दूसरी जान
बाड़मेर, 22 मार्च। शहर के पनघट रोड़ इलाके मे आवारा सांड ने सोनी जाति के एक व्यक्ति की मंगलवार को फिर जान ले ली। दो महिनों मे आवारा सांड की बलि चढने वाला यह सोनी जाति का भूरचंद दूसरा शख्स हैं। इससे पहले शहर के नामी घी व्यापारी भंवरलाल को आवारा सांड ने पटकते हुए नेमीचंद गोलेच्छा मार्ग पर मौत के घाट उतार दिया था।
उल्लेखनिय रहे कि हर सोमवार को जिला कलक्टर की अध्यक्षता मे होने वाली नगरपालिका कार्यो की साप्तािहक समीक्षात्मक बैठक मे जिला कलक्टर पालिका आयुक्त एवं अध्यक्ष को यह आदेश दे रहे हैं कि वे शहर मे घूमने वाले आवारा सांडों की धरपकड़ करें ताकि किसी तरह की जनहानि आदि की घटना नही हो सके।
प्राप्त खबर के अनुसार शहर के पनघट रोड़ क्षैत्र मे सडक़ पर चल रहे 45 वर्षीय भूरचंद सोनी को मंगलवार को एक आवारा सांड ने तीन बार बुरी तरह से सींगों पर लेकर नीचे पटका। इससे बेहोश होकर घायल हुए भूरचंद को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उपचार दौरान उसने दम तोड़ दिया।
पालिका प्रशासन पर कलक्टर के आदेश बेअसर
शहर मे दो महिनों के अंतराल से दूसरे इंसान की जान आवारा पशुओं द्वारा लिए जाने की घटना का पालिका आयुक्त एवं अध्यक्ष पर कोई फर्क पड़ता नजर नही आ रहा हैं। नगर मे बेशूमार आवारा पशु न केवल गली मौहल्लों मे बल्कि स्टेशन रोड़, पुलिस कोतवाली के पास, ढाणी बाजार, प्रतापजी की प्रोल, पुरानी सब्जी मण्डी समेत कईं इलाकों मे बेखौफ घूम रहे हैं।जिला कलक्टर हर साप्तािहक बैठक मे सोमवार को पालिका प्रशासन के इन नुमाइंदों को पाबंद करने के आदेश दे रहे हैं कि आवारा पशुओं की धरपकड़ की जाये। वहीं ऐसी दुखान्तिकाओं के बाद पालिका अध्यक्ष एवं आयुक्त बेशर्मी से मीडिया के कैमरे के सामने बयान देते हैं कि आवारा पशुओं की धरपकड़ जारी हैं? लेकिन हकीकत सामने हैं। महज दो महिनों के अंतराल मे दूसरे बेगुनाह की मौत हुई हैं तो दर्जनों जख्मी भी हुए हैं।
बाड़मेर, 22 मार्च। शहर के पनघट रोड़ इलाके मे आवारा सांड ने सोनी जाति के एक व्यक्ति की मंगलवार को फिर जान ले ली। दो महिनों मे आवारा सांड की बलि चढने वाला यह सोनी जाति का भूरचंद दूसरा शख्स हैं। इससे पहले शहर के नामी घी व्यापारी भंवरलाल को आवारा सांड ने पटकते हुए नेमीचंद गोलेच्छा मार्ग पर मौत के घाट उतार दिया था।
उल्लेखनिय रहे कि हर सोमवार को जिला कलक्टर की अध्यक्षता मे होने वाली नगरपालिका कार्यो की साप्तािहक समीक्षात्मक बैठक मे जिला कलक्टर पालिका आयुक्त एवं अध्यक्ष को यह आदेश दे रहे हैं कि वे शहर मे घूमने वाले आवारा सांडों की धरपकड़ करें ताकि किसी तरह की जनहानि आदि की घटना नही हो सके।
प्राप्त खबर के अनुसार शहर के पनघट रोड़ क्षैत्र मे सडक़ पर चल रहे 45 वर्षीय भूरचंद सोनी को मंगलवार को एक आवारा सांड ने तीन बार बुरी तरह से सींगों पर लेकर नीचे पटका। इससे बेहोश होकर घायल हुए भूरचंद को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उपचार दौरान उसने दम तोड़ दिया।
पालिका प्रशासन पर कलक्टर के आदेश बेअसर
शहर मे दो महिनों के अंतराल से दूसरे इंसान की जान आवारा पशुओं द्वारा लिए जाने की घटना का पालिका आयुक्त एवं अध्यक्ष पर कोई फर्क पड़ता नजर नही आ रहा हैं। नगर मे बेशूमार आवारा पशु न केवल गली मौहल्लों मे बल्कि स्टेशन रोड़, पुलिस कोतवाली के पास, ढाणी बाजार, प्रतापजी की प्रोल, पुरानी सब्जी मण्डी समेत कईं इलाकों मे बेखौफ घूम रहे हैं।जिला कलक्टर हर साप्तािहक बैठक मे सोमवार को पालिका प्रशासन के इन नुमाइंदों को पाबंद करने के आदेश दे रहे हैं कि आवारा पशुओं की धरपकड़ की जाये। वहीं ऐसी दुखान्तिकाओं के बाद पालिका अध्यक्ष एवं आयुक्त बेशर्मी से मीडिया के कैमरे के सामने बयान देते हैं कि आवारा पशुओं की धरपकड़ जारी हैं? लेकिन हकीकत सामने हैं। महज दो महिनों के अंतराल मे दूसरे बेगुनाह की मौत हुई हैं तो दर्जनों जख्मी भी हुए हैं।
भगवान को धोखा देने वाला माफिया अदालत से भी फरेब कर चुका हैं!
अनिल ने कोर्ट मे पेश किया फर्जी फूड लाइसेन्स
बाड़मेर, 22 मार्च। इन दिनों भगवान की पूजा के लिए घी बनाने का नाटक कर इंसानों से फरेब कारने वाले अनिल मेहता ने अदालत से भी फरेब करने का दु:साहस किया हैं। अनिल के खिलाफ नकली घी के करीब 28 से अधिक मामले विभिन्न अदालतों मे चल रहे हैं। खबर हैं कि पंकज डेयरी एण्ड फूड प्रॉडक्ट नामक घी उत्पादन कंपनी के मालिक अनिल धारीवाल के यहां जिला रसद अधिकारी के नेतृत्व मे गई एक टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए 22 जून 2010 को 6 अलग अलग किस्म का पौने आठ लाख कीमत का नकली घी बरामद किया था। उस वक्त अनिल के पास घी बनाने एवं बेचने का फूड लाइसेन्स तक नही था।
सूत्रों ने बताया कि अनिल के यहां लिए गये उक्त कथित घी के कुछ सेम्पल फेल हो गये थे। फूड इन्सपेक्टर ने इस मामले मे सीजेएम न्यायालय मे पीएफ एक्ट के तहत इस्तगासा दायर कर किया था। उस समय अदालत मे अनिल ने फर्जी फूड लाइसेन्स बना कर पेश किया। अनिल ने छापामार कार्यवाही के बाद की तारीख मे फूड इन्सपेक्टर के माध्यम से नगरपालिका बाड़मेर से यह फूड लाइसेन्स प्राप्त किया था लेकिन अदालत एवं सरकारी अफसरों के सामने पेश किए गये फूड लाइसेन्स की फोटो कॉपी मे लाइसेन्स जारी होने की दिनांक मे फेरबदल कर यह साबित कर गुनाह से बचने की कोशिश की कि उसके पास पहले से फूड लाइसेन्स था।
बंध पत्र पर सुूपर्द नकली घी भी अनिल ने बेच डाला, मामला अदालत मे लम्बित
नकली घी बेचने के आरोपी अनिल मेहता के खिलाफ वर्ष 2004 मे पुलिस ने छापामार कार्यवाही करते हुए लाखों रूपये कीमत का नकली घी बरामद कर उसे गिरफ्तार किया था। डीएसपी धनपतराज सांखला ने अनिल के खिलाफ सिटी कोतवाली मे धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। इस प्रकरण मे अनिल के जैन न्याति नोहरे की गली स्थित मकान के नीचे के गोदाम से पुलिस एवं फूड इन्सपेक्टर ने संयुक्त रूप से 2 लाख 26 हजार 918 रूपये कीमत का नकली घी बरामद किया था। अनिल को बंधपत्र पर यह घी स्वंय की सुरक्षित अभिरक्षा मे रखने के आदेश दिए गये थे। यहां के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत मे 277/2004 नम्बर से यह प्रकरण आज तक विचाराधीन हैं। इस मामले मे बरामद घी के सेम्पल फेल हुए थे तथाघी नकली पाया गया लेकिन चालाक घी माफिया अनिल ने अपनी अभिरक्षा मे सौंपे गये उक्त नकली घी को बेच दिया। जबकि अदालत के फैसले से पूर्व अनिल यह घी कानूनी तौर बेच नही सकता था।
अनिल 2 महिने बाद जमानत पर छूटा लेकिन वह भी फर्जी लाइसेन्स पर
कुख्यात नकली घी माफिया अनिल धारीवाल को 8 अगस्त 2010 को भी पुलिस ने नकली घी बनाने का कारखाना चलाने के मामले मे गिरफ्तार किया था। करीब 2 महिने से अधिक की अवधि गुजरने के बाद अनिल को दूसरी बार किए गये आवेदन पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा किया हैं। सूत्रों ने बताया कि अनिल मेहता ने इस बार भी नकली घी की फैक्ट्री चलाने का जो फूड लाइसेन्स अदालत मे पेश किया, वह भी फर्जी था।
अनिल क्या कर रहा हैं इन दिनों
नकली घी के मामलों मे जेल की सलाखों के पीछे 2 महिनों तक कैद रहने वाले अनिल ने इन दिनों नकली घी के कारोबार को फिर से शुरू करने की नई तरकीब निकाली हैं। उसकी फैक्ट्री मे नकली घी का उत्पादन किया जा रहा हैं लेकिन इस बार उसने भगवान की आस्था की आड़ ली हैं। उसकी फैक्ट्री से साहिल एवं गौरस ब्रांड से 1 किलो एवं 15 किलो पैक मे घी तैयार किया जा रहा हैं लेकिन कानून की आंखों मे धूल झोंकने के लिए उसने इन पैकिंगों पर ‘पूजन ऑयल’ एवं ‘नोट इटेबल‘ जैसे तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर लिया हैं। जबकि हिन्दुस्तान के बाजार मे आज तक कोई भी पूजन योग्य घी विशेष रूप से बिकने कभी नही आया। आश्चर्य तो इस बात का हैं कि भगवान की पूजा के लिए लोग श्रद्वा के साथ अच्छे से अच्छी गुणवता वाला घी इस्तेमाल करते हैं जबकि यहां तेल, पॉमोलिन, डालडा एवं एसेंस और अन्य हानिकारक रसायन मिला कर तैयार किया जा रहा घी पूजन ऑयल के नाम से बेचा जा रहा हैं। जो देशी घी के भावों की आधी कीमत पर दे रहा हैं। ऐसे मे पैकिंगों पर कुछ भी शब्द लिखे जा रहे हो लेकिन अनिल यह गांवों की भोली भाली जनता को नकली घी के रूप मे बेच रहा हैं।
बाड़मेर, 22 मार्च। इन दिनों भगवान की पूजा के लिए घी बनाने का नाटक कर इंसानों से फरेब कारने वाले अनिल मेहता ने अदालत से भी फरेब करने का दु:साहस किया हैं। अनिल के खिलाफ नकली घी के करीब 28 से अधिक मामले विभिन्न अदालतों मे चल रहे हैं। खबर हैं कि पंकज डेयरी एण्ड फूड प्रॉडक्ट नामक घी उत्पादन कंपनी के मालिक अनिल धारीवाल के यहां जिला रसद अधिकारी के नेतृत्व मे गई एक टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए 22 जून 2010 को 6 अलग अलग किस्म का पौने आठ लाख कीमत का नकली घी बरामद किया था। उस वक्त अनिल के पास घी बनाने एवं बेचने का फूड लाइसेन्स तक नही था।
सूत्रों ने बताया कि अनिल के यहां लिए गये उक्त कथित घी के कुछ सेम्पल फेल हो गये थे। फूड इन्सपेक्टर ने इस मामले मे सीजेएम न्यायालय मे पीएफ एक्ट के तहत इस्तगासा दायर कर किया था। उस समय अदालत मे अनिल ने फर्जी फूड लाइसेन्स बना कर पेश किया। अनिल ने छापामार कार्यवाही के बाद की तारीख मे फूड इन्सपेक्टर के माध्यम से नगरपालिका बाड़मेर से यह फूड लाइसेन्स प्राप्त किया था लेकिन अदालत एवं सरकारी अफसरों के सामने पेश किए गये फूड लाइसेन्स की फोटो कॉपी मे लाइसेन्स जारी होने की दिनांक मे फेरबदल कर यह साबित कर गुनाह से बचने की कोशिश की कि उसके पास पहले से फूड लाइसेन्स था।
बंध पत्र पर सुूपर्द नकली घी भी अनिल ने बेच डाला, मामला अदालत मे लम्बित
नकली घी बेचने के आरोपी अनिल मेहता के खिलाफ वर्ष 2004 मे पुलिस ने छापामार कार्यवाही करते हुए लाखों रूपये कीमत का नकली घी बरामद कर उसे गिरफ्तार किया था। डीएसपी धनपतराज सांखला ने अनिल के खिलाफ सिटी कोतवाली मे धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। इस प्रकरण मे अनिल के जैन न्याति नोहरे की गली स्थित मकान के नीचे के गोदाम से पुलिस एवं फूड इन्सपेक्टर ने संयुक्त रूप से 2 लाख 26 हजार 918 रूपये कीमत का नकली घी बरामद किया था। अनिल को बंधपत्र पर यह घी स्वंय की सुरक्षित अभिरक्षा मे रखने के आदेश दिए गये थे। यहां के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत मे 277/2004 नम्बर से यह प्रकरण आज तक विचाराधीन हैं। इस मामले मे बरामद घी के सेम्पल फेल हुए थे तथाघी नकली पाया गया लेकिन चालाक घी माफिया अनिल ने अपनी अभिरक्षा मे सौंपे गये उक्त नकली घी को बेच दिया। जबकि अदालत के फैसले से पूर्व अनिल यह घी कानूनी तौर बेच नही सकता था।
अनिल 2 महिने बाद जमानत पर छूटा लेकिन वह भी फर्जी लाइसेन्स पर
कुख्यात नकली घी माफिया अनिल धारीवाल को 8 अगस्त 2010 को भी पुलिस ने नकली घी बनाने का कारखाना चलाने के मामले मे गिरफ्तार किया था। करीब 2 महिने से अधिक की अवधि गुजरने के बाद अनिल को दूसरी बार किए गये आवेदन पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा किया हैं। सूत्रों ने बताया कि अनिल मेहता ने इस बार भी नकली घी की फैक्ट्री चलाने का जो फूड लाइसेन्स अदालत मे पेश किया, वह भी फर्जी था।
अनिल क्या कर रहा हैं इन दिनों
नकली घी के मामलों मे जेल की सलाखों के पीछे 2 महिनों तक कैद रहने वाले अनिल ने इन दिनों नकली घी के कारोबार को फिर से शुरू करने की नई तरकीब निकाली हैं। उसकी फैक्ट्री मे नकली घी का उत्पादन किया जा रहा हैं लेकिन इस बार उसने भगवान की आस्था की आड़ ली हैं। उसकी फैक्ट्री से साहिल एवं गौरस ब्रांड से 1 किलो एवं 15 किलो पैक मे घी तैयार किया जा रहा हैं लेकिन कानून की आंखों मे धूल झोंकने के लिए उसने इन पैकिंगों पर ‘पूजन ऑयल’ एवं ‘नोट इटेबल‘ जैसे तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर लिया हैं। जबकि हिन्दुस्तान के बाजार मे आज तक कोई भी पूजन योग्य घी विशेष रूप से बिकने कभी नही आया। आश्चर्य तो इस बात का हैं कि भगवान की पूजा के लिए लोग श्रद्वा के साथ अच्छे से अच्छी गुणवता वाला घी इस्तेमाल करते हैं जबकि यहां तेल, पॉमोलिन, डालडा एवं एसेंस और अन्य हानिकारक रसायन मिला कर तैयार किया जा रहा घी पूजन ऑयल के नाम से बेचा जा रहा हैं। जो देशी घी के भावों की आधी कीमत पर दे रहा हैं। ऐसे मे पैकिंगों पर कुछ भी शब्द लिखे जा रहे हो लेकिन अनिल यह गांवों की भोली भाली जनता को नकली घी के रूप मे बेच रहा हैं।
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