जारी रहा धरना, आज समिति की बैठक मे आंदोलन उग्र करने का फैसला
दलित तोड़ेंगे मौन, पुलिस पर विश्वास टूटा
बाड़मेर आर.टी.आई. कार्यकर्ता मंगलाराम मेघवाल एवं इन्द्रा मेघवाल प्रकरण के नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नही होने से गुस्साये दलितों ने मंगलवार को आपात बैठक बुला कर आंदोलन को उग्र करने की नीति तय करने का फैसला किया हैं। इधर सोमवार को 13 वें दिन भी दलित अत्याचार निवारण समिति के बैनर पर धरना जारी रहा। मुख्यमंत्री के नाम अपर कलक्टर को दिए ज्ञापन मे दलितों ने पुलिस के उपेक्षित एवं रूखे व्यवहार पर गहरा आक्रोश जताया गया। धरने पर खटीक समाज के मौजीज लोगों ने पहुंच कर आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया।
दलित अत्याचार निवारण समिति के संयोजक उदाराम मेघवाल ने बताया कि आर.टी.आई. कार्यकर्ता मंगलाराम के हाथ पैर तोड़ उसे लहुलुहान करने के मामले मे मुख्य आरोपी सरपंच गुलामशाह को राजनेताओं के इशारे पर पुलिस गिरफ्तार नही कर रही हैं। इसी तरह पीडि़ता इन्द्रा मेघवाल को फर्जी पट्टे से बेघर करने की कोशिश करने के आरोपियों को भी पुलिस बचा रही हैं। दलित समुदाय के लोग 13 दिन से कलेक्ट्रेट के बाहर बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं। धरना स्थल पर दलितों ने काली होली मनाते हुए एक दिन का विरोधस्वरूप उपवास रखा लेकिन प्रशासन एवं पुलिस अफसरों के कानों पर जूं तक नही रेंगी।
समिति के संयोजक उदाराम मेघवाल ने बताया कि पूर्व आश्वासन के मुताबिक सोमवार को पुलिस अधीक्षक से बातचीत की गई लेकिन वे कोई संतोषजनक प्रत्युतर नही दे सके तथा उलटे ही आरोपियों के बचाव मे बोलते नजर आये, जिसका दलितों ने खुलकर विरोध किया। उन्होने बताया कि दलित समुदाय का पुलिस अधीक्षक से भरोसा उठ गया हैं।
उन्होने बताया कि ऐसी परिस्थतियों मे समिति की आपात बैठक मंगलवार को बुलाई गई हैं जिसमें आंदोलन को उग्र करने का फैसला किया जायेगा। उन्होने इस बात पर रोष जताया कि जहां इंसाफ की जंग लड़ रहे दलित मौन एवं भूखे बैठ होली मना रहे थे उस समय प्रशासन के अफसर होली के रंग मे मस्त होकर नाच गा रहे थे। ऐसी क्रूरता किसी भी सूरत मे बर्दाश्त नही की जाएगी।
सोमवार को खटीक समाज के एच.आर. खींची, मदनलाल नागोरा, प्रकाश खींची एवं प्रकाशचन्द्र सहित कईं मौजीज लोगों ने धरना स्थल पर पहुंच अपना समर्थन दिया। इसी तरह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आदूराम मेघवाल, बसपा के पूर्व अध्यक्ष श्रवण चंदेल, मुरारीलाल बालाच, किसनलाल गर्ग, लाभूराम पंवार, सुवारा खां तथा तुलछदान चारण सहित कईं जनों ने धरने पर बैठ कर विरोध जताया।
दलित तोड़ेंगे मौन, पुलिस पर विश्वास टूटा
बाड़मेर आर.टी.आई. कार्यकर्ता मंगलाराम मेघवाल एवं इन्द्रा मेघवाल प्रकरण के नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नही होने से गुस्साये दलितों ने मंगलवार को आपात बैठक बुला कर आंदोलन को उग्र करने की नीति तय करने का फैसला किया हैं। इधर सोमवार को 13 वें दिन भी दलित अत्याचार निवारण समिति के बैनर पर धरना जारी रहा। मुख्यमंत्री के नाम अपर कलक्टर को दिए ज्ञापन मे दलितों ने पुलिस के उपेक्षित एवं रूखे व्यवहार पर गहरा आक्रोश जताया गया। धरने पर खटीक समाज के मौजीज लोगों ने पहुंच कर आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया।
दलित अत्याचार निवारण समिति के संयोजक उदाराम मेघवाल ने बताया कि आर.टी.आई. कार्यकर्ता मंगलाराम के हाथ पैर तोड़ उसे लहुलुहान करने के मामले मे मुख्य आरोपी सरपंच गुलामशाह को राजनेताओं के इशारे पर पुलिस गिरफ्तार नही कर रही हैं। इसी तरह पीडि़ता इन्द्रा मेघवाल को फर्जी पट्टे से बेघर करने की कोशिश करने के आरोपियों को भी पुलिस बचा रही हैं। दलित समुदाय के लोग 13 दिन से कलेक्ट्रेट के बाहर बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं। धरना स्थल पर दलितों ने काली होली मनाते हुए एक दिन का विरोधस्वरूप उपवास रखा लेकिन प्रशासन एवं पुलिस अफसरों के कानों पर जूं तक नही रेंगी।
समिति के संयोजक उदाराम मेघवाल ने बताया कि पूर्व आश्वासन के मुताबिक सोमवार को पुलिस अधीक्षक से बातचीत की गई लेकिन वे कोई संतोषजनक प्रत्युतर नही दे सके तथा उलटे ही आरोपियों के बचाव मे बोलते नजर आये, जिसका दलितों ने खुलकर विरोध किया। उन्होने बताया कि दलित समुदाय का पुलिस अधीक्षक से भरोसा उठ गया हैं।
उन्होने बताया कि ऐसी परिस्थतियों मे समिति की आपात बैठक मंगलवार को बुलाई गई हैं जिसमें आंदोलन को उग्र करने का फैसला किया जायेगा। उन्होने इस बात पर रोष जताया कि जहां इंसाफ की जंग लड़ रहे दलित मौन एवं भूखे बैठ होली मना रहे थे उस समय प्रशासन के अफसर होली के रंग मे मस्त होकर नाच गा रहे थे। ऐसी क्रूरता किसी भी सूरत मे बर्दाश्त नही की जाएगी।
सोमवार को खटीक समाज के एच.आर. खींची, मदनलाल नागोरा, प्रकाश खींची एवं प्रकाशचन्द्र सहित कईं मौजीज लोगों ने धरना स्थल पर पहुंच अपना समर्थन दिया। इसी तरह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आदूराम मेघवाल, बसपा के पूर्व अध्यक्ष श्रवण चंदेल, मुरारीलाल बालाच, किसनलाल गर्ग, लाभूराम पंवार, सुवारा खां तथा तुलछदान चारण सहित कईं जनों ने धरने पर बैठ कर विरोध जताया।
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