और आखिर इन्द्रा का सुहाग ही उजड़ गया!
न्याय की जगह प्रताडऩा, चिंता मे पति ने दम तोड़ा
बाड़मेर, 9 मई। फ र्जी पट्टा प्रकरण को लेकर कईं दिनों तक बेमियादी धरने पर बैठी रही दलित महिला इन्द्रा मेघवाल को आज तक न्याय तो नही मिला लेकिन लड़ते लड़ते उसका सुहाग जरूर उजड़ गया। खबर हैं कि बुधवार की रात अपने बीवी बच्चों व घर की चिंता करते करते उसके पति भंवरलाल मेघवाल ने दम तोड़ दिया। उल्लेखनिय रहे कि स्वंय इन्द्रा मेघवाल ने राज्य सरकार एवं वरिश्ठतम अफसरों को लगातार लिखा कि उनके कैंसर पीडि़त पति उनके जीते जी घर बदर करने की कोषिषों से लगातार चिंतित हैं। इस चिंता के चलते वे कभी भी अनहोनी का षिकार हो सकते है। आखिर बुधवार की रात यही हुआ इन्द्रा के साथ।
ज्ञात रहे कि उतरलाई रोड़ पर रहने वाली इन्द्रा मेघवाल के रहवासी मकान का फर्जी दस्तावेजों से पट्टा नगरपालिका के कर्मचारियों, अधिकारियों ने बना कर उसके ही पड़ोस मे रहने वाले मेघाराम जाट के नाम कर दिया था। इसके बाद मेघाराम ने इन्द्रा को घर बदर करने की कोषिष षुरू की। उसके विरूद्व न केवल न्यायालय मे कार्यवाही की बल्कि पुलिस मे भी 5 मार्च 2011 को झूठा मुकदमा दर्ज करवाया कि इन्द्रा व उसके बच्चों ने उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोषिष की। लेकिन 23 फरवरी को इन्द्रा मेघवाल द्वारा मेघाराम जाट एवं नगरपालिका के कार्मिकों के विरूद्व दर्ज करवाये गये मामले मे पुलिस ने आंदोलन के चलते बड़ी मुष्कील से आरोपियों को गिरफ्तार किया। अंत मे पुलिस को मेघाराम द्वारा दर्ज करवाई गई झूठी एफआईआर को झूठा साबित करते हुए एफआर भी दी।
सूत्रों ने बताया कि अभी तक इन्द्रा मेघवाल के रहवासी मकान का जारी फर्जी पट्टा निरस्त नही हुआ हैं। स्वंय इन्द्रा को धमकाने तथा उस पर मेघाराम व नगरपालिका कार्मिकों द्वारा मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी कड़ी मे इन्द्रा मेघवाल और इसके सहयोगियों के विरूद्व उसे आंतकित करने के लिए 9 मई 2011 को मेघाराम ने एक और झूठा मामला पुलिस मे दर्ज करवा लिया। इस मामले मे इन्द्रा व सहयोगियों को पुलिस गिरफ्तार करने पर आमादा हो गई जिस पर उन्हें हाईकोर्ट की षरण लेनी पड़ी। इस तरह जीते जी कैंसर पीडि़त पति की चिंताएं लगातार बढती गई और पूर्व मे जताई आषंका के मुताबिक ही उसके पति आखिर दम तोड़ ही लिया।
बहरहॉल,विरोधियों की लगातार मिल रही प्रताडऩाओं व धमकियों से इन्द्रा मेघवाल तथा उसके परिजन दहषत मे हैं उसका सुहाग भी उजड़ चुका हैं ऐसे मे इन्द्रा को न्याय एवं राहत की उम्मीद और आषा बची हैं तो सिर्फ प्रषासन तथा राज्य सरकार से। इन्द्रा को मलाल इस बात का हैं कि उसके द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर पर भी आरोपियों की गिरफ्तारी नही की जा रही हैं ठीक विपरित उसके एवं सहयोगियों के विरूद्व ही एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास षुरू कर दिए गये। इन्द्रा का कहना हैं कि अब तो प्रषासन व सरकार को भी उसके आहत होने का अहसास जरूर होगा तथा वे आरोपियों को जेल के सिखंचों तक अवष्य पहुंचायेंगे। इन्द्रा मेघवाल के परिजनों के मुताबिक संवेदनषील बनी हुई राज्य सरकार अब तो कम से कम इन्द्रा मेघवाल के धैर्य का इम्तिहान नही लेगी।
न्याय की जगह प्रताडऩा, चिंता मे पति ने दम तोड़ा
बाड़मेर, 9 मई। फ र्जी पट्टा प्रकरण को लेकर कईं दिनों तक बेमियादी धरने पर बैठी रही दलित महिला इन्द्रा मेघवाल को आज तक न्याय तो नही मिला लेकिन लड़ते लड़ते उसका सुहाग जरूर उजड़ गया। खबर हैं कि बुधवार की रात अपने बीवी बच्चों व घर की चिंता करते करते उसके पति भंवरलाल मेघवाल ने दम तोड़ दिया। उल्लेखनिय रहे कि स्वंय इन्द्रा मेघवाल ने राज्य सरकार एवं वरिश्ठतम अफसरों को लगातार लिखा कि उनके कैंसर पीडि़त पति उनके जीते जी घर बदर करने की कोषिषों से लगातार चिंतित हैं। इस चिंता के चलते वे कभी भी अनहोनी का षिकार हो सकते है। आखिर बुधवार की रात यही हुआ इन्द्रा के साथ।
ज्ञात रहे कि उतरलाई रोड़ पर रहने वाली इन्द्रा मेघवाल के रहवासी मकान का फर्जी दस्तावेजों से पट्टा नगरपालिका के कर्मचारियों, अधिकारियों ने बना कर उसके ही पड़ोस मे रहने वाले मेघाराम जाट के नाम कर दिया था। इसके बाद मेघाराम ने इन्द्रा को घर बदर करने की कोषिष षुरू की। उसके विरूद्व न केवल न्यायालय मे कार्यवाही की बल्कि पुलिस मे भी 5 मार्च 2011 को झूठा मुकदमा दर्ज करवाया कि इन्द्रा व उसके बच्चों ने उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोषिष की। लेकिन 23 फरवरी को इन्द्रा मेघवाल द्वारा मेघाराम जाट एवं नगरपालिका के कार्मिकों के विरूद्व दर्ज करवाये गये मामले मे पुलिस ने आंदोलन के चलते बड़ी मुष्कील से आरोपियों को गिरफ्तार किया। अंत मे पुलिस को मेघाराम द्वारा दर्ज करवाई गई झूठी एफआईआर को झूठा साबित करते हुए एफआर भी दी।
सूत्रों ने बताया कि अभी तक इन्द्रा मेघवाल के रहवासी मकान का जारी फर्जी पट्टा निरस्त नही हुआ हैं। स्वंय इन्द्रा को धमकाने तथा उस पर मेघाराम व नगरपालिका कार्मिकों द्वारा मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी कड़ी मे इन्द्रा मेघवाल और इसके सहयोगियों के विरूद्व उसे आंतकित करने के लिए 9 मई 2011 को मेघाराम ने एक और झूठा मामला पुलिस मे दर्ज करवा लिया। इस मामले मे इन्द्रा व सहयोगियों को पुलिस गिरफ्तार करने पर आमादा हो गई जिस पर उन्हें हाईकोर्ट की षरण लेनी पड़ी। इस तरह जीते जी कैंसर पीडि़त पति की चिंताएं लगातार बढती गई और पूर्व मे जताई आषंका के मुताबिक ही उसके पति आखिर दम तोड़ ही लिया।
बहरहॉल,विरोधियों की लगातार मिल रही प्रताडऩाओं व धमकियों से इन्द्रा मेघवाल तथा उसके परिजन दहषत मे हैं उसका सुहाग भी उजड़ चुका हैं ऐसे मे इन्द्रा को न्याय एवं राहत की उम्मीद और आषा बची हैं तो सिर्फ प्रषासन तथा राज्य सरकार से। इन्द्रा को मलाल इस बात का हैं कि उसके द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर पर भी आरोपियों की गिरफ्तारी नही की जा रही हैं ठीक विपरित उसके एवं सहयोगियों के विरूद्व ही एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास षुरू कर दिए गये। इन्द्रा का कहना हैं कि अब तो प्रषासन व सरकार को भी उसके आहत होने का अहसास जरूर होगा तथा वे आरोपियों को जेल के सिखंचों तक अवष्य पहुंचायेंगे। इन्द्रा मेघवाल के परिजनों के मुताबिक संवेदनषील बनी हुई राज्य सरकार अब तो कम से कम इन्द्रा मेघवाल के धैर्य का इम्तिहान नही लेगी।
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