विधायक महोदय! पहले अपने गिरेबां मे झांके, फिर दूसरों पर कीचड़ उछालें
बाड़मेर। शुक्रवार को जिला कलक्टर गौरव गोयल की अध्यक्षता मे हुई जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक मे मौजूद विधायक मेवाराम जैन ने भ्रष्ट, घूसखोर एवं गबन करने वाले कार्मिकों और अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर लाखों का चूना लगाने वाले माफियाओं के पक्ष मे न केवल खुल कर पैरोकारी की बल्कि परिवादियों पर कीचड़ उछालने मे इस कदर उतावलापन दिखाया जैसे कि उन पर कोई व्यक्तिगत हमला बोल रहा हो? ये परिवादी दैनिक मरूलहर से जुड़े हुए थे। संगीन आरोपों से जुड़े मुद््दों पर सतर्कता समिति विचार कर रही थी। विधायक ने परिवादियों के बोलने से पहले ही उन पर ब्लेकमेल करने, धमकाने और पैसा ऐंठने जैसे ऊल-जुलूल आरोपों की बौछार करनी शुरू कर दी ताकि वे उनकी आवाज को कुचलने मे सफल हो सके और अपराधियों-दोषियों को बचाने मे कामयाब हो सके। विधायक की ऐसी ओछी हरकतों से समिति की बैठक मे मौजूद जनप्रतिनिधि एवं अफसर हक्के-बक्के रह गये और सोचने को मजबूर हो गये कि आखिर जनता एवं सरकार से जुड़े ऐसे गंभीर मुद््दों पर निजी द्वेषता दिखा कर अनर्गल क्यों बोल रहे हैं?
विधायक महोदय! शुक्रवार को सतर्कता समिति की बैठक मे आप जो कुछ बोले लेकिन बोलने से पहले थोड़ा सोचते जरूर कि मैं क्या बोल रहा हूं? दूसरों पर अनर्गल-बकवास आरोप लगाने से पहले अपना दामन तो देख लेते और अपने गिरेबां मे थोड़ा झांक कर देख लेते? असली भ्रष्ट और अपराधी आपके ही घर मे छुपे हुए हैं।
विधायक महोदय! आप अपने दिल पर हाथ रख कर सोचो कि आपने अब तक हमारे जैसे कितने बेगुनाहों पर झूठे आपराधिक मुकदमे पुलिस व माफियाओं से मिलकर दर्ज करवाये हैं और उनके क्या नतीजे रहे हैं? आपने अब तक कितने गरीबों के घर उजाड़े हैं कितनों का सुहाग छीनने की कोशिशें की हैं? आपने कितने मां-बाप के बेटों, विवाहितों के पतियों, मासूम बच्चों के पिताओं को बेगुनाह एवं निर्दोष होते हुए न केवल झूठे मामलों मे फंसाया बल्कि उन पर स्वंय के सरंक्षण मे पलने वाले गुण्डों से हमले करवाये? यह अलग बात हैं कि आपके पैसों की ताकत और राजनीतिक पहुंच के कारण पुलिस ने आपको क्लीन-चिट दे दी हो? विधायक महोदय! आपका दामन गुनाहों से भरा पड़ा हैं गुनाह रूपी खून से लथपथ पड़े हैं आपके कपड़े। आप अपनी पहुंच के बल पर कानून को भले ही हर बार मात दे पाये हो लेकिन ईश्वर को आप कभी मात देने मे सफल नही रहे और न रहोगे? नतीजे आपके सामने हैं आप भुगत भी रहे हैं?
जहां तक मरूलहर एवं उससे जुड़े पत्रकारों, सम्पादक पर ब्लेकमेलिंग करके धन अर्जित करने का सवाल हैं मैं यह चुनौती देता हूं कि आप आयकर, पुलिस, सीबीआई या हिन्दुस्तान की किसी एजेन्सी से जांच करवा कर देख लें। मैरे परिवार एवं परिवार से जुड़े लोगों व मैरे बैंक खातों, जमीन और जायदाद की जांच करवा कर देख लें कि उनके पास क्या हैं? जांच मे सामने आयेगा कि असलियत मे कितना कर्ज हैं और समाचार पत्र का प्रकाशन किन मुसीबतों मे जारी हैं? और आप अपने बही खाते, जमीन जायदाद को भी देख लें कि यह कहां से आई हैं क्या खून पसीने की कमाई से ये ऐशो-आराम, दौलत जुटाई हैं।
मैं वही मरूलहर चलाता हूं जिसने बाड़मेर मे सफेद कपड़े पहन कर नेता गिरी करने वाले काले चेहरों को घूसखोरी, भ्रष्टाचार और काली करतूतों को न केवल उजागर किया बल्कि पुलिस एवं कचहरी तक ले गया? मैं वही हूं जिसने नकली एवं मिलावटी कारोबार करने वाले माफियाओं को अनगिनित तादाद मे जेल की सलाखों तक पहुंचाया? मैं वही हूं जिसने कितना भी बड़ा भ्रष्ट, घूसखोर और नियम विरूद्व चलने वाला अफसर क्यों न हो, उसकी असलियत का भण्डाफोड़ करने का साहस जुटाया हैं। आज भी करोड़ों के जमीनी और चारा घोटालों, फर्जी पट्टों और अवैध बिल्डिंगों को लेकर आवाज उठा रखी हैं। अखबारों मे छपी खबरों पर कार्यवाही नही होने पर विधिक नोटिस दिये गये लेकिन सरकार नही चेती तो मैने स्वंय ने माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय मे एक नही तीन-तीन जनहित याचिकाएं दायर कर दोषीजनों पर कार्यवाही की मांग की। इन घोटालों मे आप जैसे सत्ता तक पहुंच रखने वाले राजनेता, उनके रिश्तेदार, बड़े भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी और गबन करने वाले शामिल हैं जिनके पास कोई कानूनी जवाब नही रहा तो पिछले दिनों आप जैसे लोगों ने ही मिल कर मैरे एवं मैरे सहयोगियों के विरूद्व फर्जी एवं जाली मुकदमे पुलिस से मिल कर दर्ज करवाये और गिरफ्तार करवा कर जलील-अपमानित करने की कोशिश की लेकिन न्याय मे विश्वास रखने वाले हमारे जैसे लोगों ने अदालत से न्याय हांसिल करने की कार्यवाही की।
अब बौखलाये आप जैसे लोग फिर अपने गिरोह के माध्यम से हम जैसे बेगुनाहों को जबरन गुनहार बनाने, कलंकित करने एवं हतोत्साहित करने के साथ साथ हमारे एवं हमारे सहयोगियों, परिजनों को येनकेन प्रकारेण क्षति पहुंचाने की कवायद मे जुटे हुए हैं। हमें पता हैं आपके पुराने कारनामों का। आप सत्ता एवं पैसों के बल पर हमारे पर जानलेवा हमले करवा सकते हैं, झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर जलील करवा सकते हैं हैरान-परेशान करवा सकते हैं। आप मे आपकी बातों मे, आपके चेल-चपाटों मे थोड़ा बहुत ही सच हैं या थोड़ा ही कानून एवं भगवान मे यकीन करते हैं तो खुले मे आकर हमारी शिकायतों, आरोपों का तथ्यात्मक एवं कागजी प्रमाणों से जवाब देने का साहस जुटा कर दिखायें? सिर्फ अनर्गल-बकवास आरोप लगा कर किसी को संगठित होकर आप जैसे लोग अभी तो परेशान कर सकते हैं लेकिन आखिर सच्चाई की जीत भगवान के घर और न्याय की देवी के घर मे तो होगी ही? मैरा तो यही कहना हैं कि आपने जनप्रतिनिधि चुने जाने के दौरान कानून के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता की जो शपथ ईश्वर की कसम खाकर ली थी, उस पर अब तो चलना शुरू करें। सफेद वस्त्रों मे काला चेहरा एवं बदनुमा आत्मा लेकर घूमना बंद कर दीजिए। आपकी आत्मा पर हाथ रख कर भगवान को सामने देख यह सोचें तो सही कि आपके ईर्द गिर्द कौन हैं कैसे लोग हैं आप किनकी पैरवी कर रहे हैं किसको सता रहे हैं प्रताडि़त कर रहे हैं। आपने अपने निजी जीवन मे ऐसी बुराईयों के नतीजे तो देख रखे हैं अब आगामी जन्म के लिए ऐसे कृत्य-पाप तो न करें जो आपको बाद मे भी कभी माफ नही करेगा।
बाड़मेर। शुक्रवार को जिला कलक्टर गौरव गोयल की अध्यक्षता मे हुई जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक मे मौजूद विधायक मेवाराम जैन ने भ्रष्ट, घूसखोर एवं गबन करने वाले कार्मिकों और अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर लाखों का चूना लगाने वाले माफियाओं के पक्ष मे न केवल खुल कर पैरोकारी की बल्कि परिवादियों पर कीचड़ उछालने मे इस कदर उतावलापन दिखाया जैसे कि उन पर कोई व्यक्तिगत हमला बोल रहा हो? ये परिवादी दैनिक मरूलहर से जुड़े हुए थे। संगीन आरोपों से जुड़े मुद््दों पर सतर्कता समिति विचार कर रही थी। विधायक ने परिवादियों के बोलने से पहले ही उन पर ब्लेकमेल करने, धमकाने और पैसा ऐंठने जैसे ऊल-जुलूल आरोपों की बौछार करनी शुरू कर दी ताकि वे उनकी आवाज को कुचलने मे सफल हो सके और अपराधियों-दोषियों को बचाने मे कामयाब हो सके। विधायक की ऐसी ओछी हरकतों से समिति की बैठक मे मौजूद जनप्रतिनिधि एवं अफसर हक्के-बक्के रह गये और सोचने को मजबूर हो गये कि आखिर जनता एवं सरकार से जुड़े ऐसे गंभीर मुद््दों पर निजी द्वेषता दिखा कर अनर्गल क्यों बोल रहे हैं?
विधायक महोदय! शुक्रवार को सतर्कता समिति की बैठक मे आप जो कुछ बोले लेकिन बोलने से पहले थोड़ा सोचते जरूर कि मैं क्या बोल रहा हूं? दूसरों पर अनर्गल-बकवास आरोप लगाने से पहले अपना दामन तो देख लेते और अपने गिरेबां मे थोड़ा झांक कर देख लेते? असली भ्रष्ट और अपराधी आपके ही घर मे छुपे हुए हैं।
विधायक महोदय! आप अपने दिल पर हाथ रख कर सोचो कि आपने अब तक हमारे जैसे कितने बेगुनाहों पर झूठे आपराधिक मुकदमे पुलिस व माफियाओं से मिलकर दर्ज करवाये हैं और उनके क्या नतीजे रहे हैं? आपने अब तक कितने गरीबों के घर उजाड़े हैं कितनों का सुहाग छीनने की कोशिशें की हैं? आपने कितने मां-बाप के बेटों, विवाहितों के पतियों, मासूम बच्चों के पिताओं को बेगुनाह एवं निर्दोष होते हुए न केवल झूठे मामलों मे फंसाया बल्कि उन पर स्वंय के सरंक्षण मे पलने वाले गुण्डों से हमले करवाये? यह अलग बात हैं कि आपके पैसों की ताकत और राजनीतिक पहुंच के कारण पुलिस ने आपको क्लीन-चिट दे दी हो? विधायक महोदय! आपका दामन गुनाहों से भरा पड़ा हैं गुनाह रूपी खून से लथपथ पड़े हैं आपके कपड़े। आप अपनी पहुंच के बल पर कानून को भले ही हर बार मात दे पाये हो लेकिन ईश्वर को आप कभी मात देने मे सफल नही रहे और न रहोगे? नतीजे आपके सामने हैं आप भुगत भी रहे हैं?
जहां तक मरूलहर एवं उससे जुड़े पत्रकारों, सम्पादक पर ब्लेकमेलिंग करके धन अर्जित करने का सवाल हैं मैं यह चुनौती देता हूं कि आप आयकर, पुलिस, सीबीआई या हिन्दुस्तान की किसी एजेन्सी से जांच करवा कर देख लें। मैरे परिवार एवं परिवार से जुड़े लोगों व मैरे बैंक खातों, जमीन और जायदाद की जांच करवा कर देख लें कि उनके पास क्या हैं? जांच मे सामने आयेगा कि असलियत मे कितना कर्ज हैं और समाचार पत्र का प्रकाशन किन मुसीबतों मे जारी हैं? और आप अपने बही खाते, जमीन जायदाद को भी देख लें कि यह कहां से आई हैं क्या खून पसीने की कमाई से ये ऐशो-आराम, दौलत जुटाई हैं।
मैं वही मरूलहर चलाता हूं जिसने बाड़मेर मे सफेद कपड़े पहन कर नेता गिरी करने वाले काले चेहरों को घूसखोरी, भ्रष्टाचार और काली करतूतों को न केवल उजागर किया बल्कि पुलिस एवं कचहरी तक ले गया? मैं वही हूं जिसने नकली एवं मिलावटी कारोबार करने वाले माफियाओं को अनगिनित तादाद मे जेल की सलाखों तक पहुंचाया? मैं वही हूं जिसने कितना भी बड़ा भ्रष्ट, घूसखोर और नियम विरूद्व चलने वाला अफसर क्यों न हो, उसकी असलियत का भण्डाफोड़ करने का साहस जुटाया हैं। आज भी करोड़ों के जमीनी और चारा घोटालों, फर्जी पट्टों और अवैध बिल्डिंगों को लेकर आवाज उठा रखी हैं। अखबारों मे छपी खबरों पर कार्यवाही नही होने पर विधिक नोटिस दिये गये लेकिन सरकार नही चेती तो मैने स्वंय ने माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय मे एक नही तीन-तीन जनहित याचिकाएं दायर कर दोषीजनों पर कार्यवाही की मांग की। इन घोटालों मे आप जैसे सत्ता तक पहुंच रखने वाले राजनेता, उनके रिश्तेदार, बड़े भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी और गबन करने वाले शामिल हैं जिनके पास कोई कानूनी जवाब नही रहा तो पिछले दिनों आप जैसे लोगों ने ही मिल कर मैरे एवं मैरे सहयोगियों के विरूद्व फर्जी एवं जाली मुकदमे पुलिस से मिल कर दर्ज करवाये और गिरफ्तार करवा कर जलील-अपमानित करने की कोशिश की लेकिन न्याय मे विश्वास रखने वाले हमारे जैसे लोगों ने अदालत से न्याय हांसिल करने की कार्यवाही की।
अब बौखलाये आप जैसे लोग फिर अपने गिरोह के माध्यम से हम जैसे बेगुनाहों को जबरन गुनहार बनाने, कलंकित करने एवं हतोत्साहित करने के साथ साथ हमारे एवं हमारे सहयोगियों, परिजनों को येनकेन प्रकारेण क्षति पहुंचाने की कवायद मे जुटे हुए हैं। हमें पता हैं आपके पुराने कारनामों का। आप सत्ता एवं पैसों के बल पर हमारे पर जानलेवा हमले करवा सकते हैं, झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर जलील करवा सकते हैं हैरान-परेशान करवा सकते हैं। आप मे आपकी बातों मे, आपके चेल-चपाटों मे थोड़ा बहुत ही सच हैं या थोड़ा ही कानून एवं भगवान मे यकीन करते हैं तो खुले मे आकर हमारी शिकायतों, आरोपों का तथ्यात्मक एवं कागजी प्रमाणों से जवाब देने का साहस जुटा कर दिखायें? सिर्फ अनर्गल-बकवास आरोप लगा कर किसी को संगठित होकर आप जैसे लोग अभी तो परेशान कर सकते हैं लेकिन आखिर सच्चाई की जीत भगवान के घर और न्याय की देवी के घर मे तो होगी ही? मैरा तो यही कहना हैं कि आपने जनप्रतिनिधि चुने जाने के दौरान कानून के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता की जो शपथ ईश्वर की कसम खाकर ली थी, उस पर अब तो चलना शुरू करें। सफेद वस्त्रों मे काला चेहरा एवं बदनुमा आत्मा लेकर घूमना बंद कर दीजिए। आपकी आत्मा पर हाथ रख कर भगवान को सामने देख यह सोचें तो सही कि आपके ईर्द गिर्द कौन हैं कैसे लोग हैं आप किनकी पैरवी कर रहे हैं किसको सता रहे हैं प्रताडि़त कर रहे हैं। आपने अपने निजी जीवन मे ऐसी बुराईयों के नतीजे तो देख रखे हैं अब आगामी जन्म के लिए ऐसे कृत्य-पाप तो न करें जो आपको बाद मे भी कभी माफ नही करेगा।
महावीर जैन
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