शुक्रवार, 10 जून 2011

विधायक पर गिर सकती हैं गाज!

विधायक पर गिर सकती हैं गाज!
ऑडिट निदेशक ने मांगी रिपोर्ट
कार्यालय संवाददाता
बाड़मेर। क्षैत्रीय विधायक एवं तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मेवाराम जैन पर कभी भी कार्यवाही हो सकती है। बकायदा इस आषय का पत्र स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग के संयुक्त निदेषक ने स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को पत्र लिखा हैं और कहा हैं कि हाईकोर्ट के 9 दिसंबर 2005 के आदेशानुसार पूर्व पालिका अध्यक्ष एवं वर्तमान बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन सहित अन्य दोशीजनों के विरूद्व आवष्यक कार्यवाही करते हुए पालना रिपोर्ट पेश करें।
क्या था मामला
वर्तमान विधायक जो पूर्व मे पालिका अध्यक्ष के पद पर बाड़मेर नगरपालिका मे नियुक्त थे। इनके वर्ष 2000-2001 के कार्यकाल की पट्टा पत्रावलियों की विशेष जांच पूर्व पार्षद सुखदेव वैष्णव की शिकायत पर की गई थी। इसमें बड़ी तादाद मे नियम विरूद्व पट्टे जारी करने के आरोपों की पुष्टि विषेश ऑडिट ने करते हुए कार्यवाही की सिफारिश स्थानीय निकाय निदेषक से की थी।
इस बीच पूर्व पार्षद सुखदेव वैष्णव ने कार्यवाही नही होने पर हाईकोर्ट की खण्डपीठ के समक्ष जनहित याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने 9 दिसंबर 2005 को निर्णय देकर दोशीजनों के विरूद्व कार्यवाही के निर्देश दिये लेकिन इन मामलों मे दोषी पाये गये पूर्व पालिका अध्यक्ष मेवाराम जैन एवं अन्य अधिकारियों के विरूद्व आज तक कोई कार्यवाही नही हुई। इस पर स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग के संयुक्त निदेशक ने स्थानीय निकाय विभाग के निदेषक को 21 दिसंबर 2007,12 मार्च 2008, 17 जून 2010, 22 जनवरी 2010, 26 मार्च 2010, 18 मई 2010 तथा 6 अक्टूबर 2010 तथा 17 जनवरी 2011 को विभिन्न पत्र लिख कर इनके विरूद्व कार्यवाही की मांग की लेकिन राजनीतिक प्रभाव से विधायक ने इन मामलों मे कोई कार्यवाही नही होने दी।
सूत्रों ने बताया कि ऑडिट विभाग के संयुक्त निदेषक ने पत्रांक 4170 दिनांक 26 मई 2011 को निदेषक के नाम एक और पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 9 दिसंबर 2005 की पालना सुनिश्चित करते हुए नगरपालिका बाड़मेर के भूमि प्रकरणों की विशेष जांच के प्रतिवेदन के आक्षेपों की पालना सुनिष्चित करावें तथा इस प्रकरण मे दोशी रहे पूर्व पालिका अध्यक्ष मेवाराम जैन, पूर्व अधिशाषी अधिकारी मूलाराम लोहिया, नारायणसिंह सांदू, कनिष्ठ अभियंता संदीप माथुर के विरूद्व  आवष्यक कार्यवाही करते हुए पालना रिपोर्ट पेश करें। ऐसे मे जाहिर हैं कि समय रहते अब कभी भी मौजूदा विधायक पर पूर्व के कारनामों के मध्यनजर कार्यवाही की गाज गिर सकती है।

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