रविवार, 10 जुलाई 2011

बाड़मेर। गलत एवं नियम विरूद्व फर्जी पट्टे देकर करोड़ों का गबन करने वाले पालिका कर्मचारियों को दुध का धुला साबित करने की कोशिशें यहां के आयुक्त ने शुरू कर दी है। आयुक्त ने शनिवार को एक विज्ञापन जोधपुर से निकलने वाले अखबार मे छपवाया कि प्राय: यह देखा गया हैं कि यहां विचाराधीन एवं जारी हो चुके पट्टों की फाइलें संबंधित आवेदक/आमजन के पास है। वह तत्काल जमा करवा दें अन्यथा नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
आश्चर्य तो इस बात का हैं कि पालिका मे लाखों की रिश्वत लेकर फर्जी और नियम विरूद्व पट्टे देने वाले कार्मिक और  अधिकारी बड़े स्तर फाइलें सबूत नष्ट करने के लिहाज से गायब कर चुके हैं तथा वर्षो से फाइलें गुम करने के मामले मे यहां के कईं प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी जांच रिपोर्टे आला अफसरों को भेज चुके है। इस बीच आयुक्त ने फाइलें गायब करने व ले जाने का दोष आवेदकों पर थोंपने के लिए उक्त विज्ञापन जारी कर दिया।
जांचें दबाने व गोलमाल करने के लिए दिया विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि उच्चस्तर पर यहां जारी हुए फर्जी पट्टों को लेकर जांच की प्रक्रिया चल रही है। जबकि दोषी कार्मिकों व अधिकारियों ने फर्जी पट्टे बना कर फाइलें ही गायब कर ली तथा सबूत नष्ट कर रखे है।
ऐसे मे जांच अधिकारियों को अंगूठा दिखाने के लिए आयुक्त ने यह विज्ञापन जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री ही नही की बल्कि दोषी कार्मिकों का दोष आम आवेदकों व पब्लिक पर थोंपने की चतुराई दिखाई।
क्यों नही करवाते एफ आईआर दर्ज
नगरपालिका मे पट्टों की फाइलें हो या किसी दूसरे प्रकरणों की, इन फाइलों के संधारण की जिम्मेदारी संबंधित लिपिक एवं शाखा प्रभारी तथा खुद आयुक्त की है। आश्चर्य तो यह हैं कि ऑफिस व्यवस्था के तहत नियम यह भी हैं कि नगरपालिका मे भी एक शाखा से दूसरी शाखा मे फाइल जाने पर वहां संधारित किए जाने वाले रजिस्टर मे इंद्राज किया जाये।
नियमानुसार जिस शाखा से फाइलें गायब हैं उस शाखा प्रभारी व लिपिक को जवाबदेह मानते हुए एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्टो मे यह जाहिर हो चुका हैं कि यहां गलत कार्य करने के बाद फाइलें गायब कर देना आम बात हो गई है। ऐसे मे पालिका आयुक्त जवाबदेह दोषी कार्मिकों व अधिकारियों को न केवल बचाने बल्कि फर्जी कार्यो को छुपाने के लिए ऐसे प्रयास क्यों कर रहे हैं, यह जांच का विषय है। अहम सवाल यह हैं कि आखिर आयुक्त कैसे कह सकते हैं कि फाइलें पब्लिक या आवेदक के पास है।
आयुक्त गैरकानूनी विज्ञापन जारी कर दोषी व रिकॉर्ड गायब करने वाले कार्मिकों पर मेहरबानी क्यों दिखा रहे हैं! आयुक्त अपने विज्ञापन के मुताबिक अब सैकड़ों फाइलें गायब मिलने पर क्या संबंधित आवेदक के विरूद्व एफआईआर दर्ज करवायेंगे और करवायेंगे तो किस आधार पर!


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